गोरखपुर से बड़ी खबर: लखनऊ के खिचड़ी भोज कार्यक्रम से लौटे कर्मचारी नेताओं ने गोरखपुर में महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई और आगे की रणनीति तय की गई। नेताओं ने साफ कहा है कि अगर सरकार ने जल्द इन मांगों को नहीं माना, तो पूरे देश में बड़ा आंदोलन शुरू हो सकता है।
खिचड़ी भोज कार्यक्रम का महत्व
कल लखनऊ में आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महासचिव कामरेड शिवगोपाल मिश्रा के नेतृत्व में एक बड़ा खिचड़ी भोज हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश भर से केंद्रीय और राज्य सरकार के हजारों कर्मचारी शामिल हुए। यह कार्यक्रम राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी के निमंत्रण पर आयोजित किया गया था। यह सिर्फ भोजन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि कर्मचारियों की एकजुटता और आने वाले संघर्ष की शुरुआत दिखाने वाला मंच था।
गोरखपुर में हुई संयुक्त बैठक
लखनऊ से वापस लौटने के बाद तारामंडल स्थित बंटी लॉन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद और पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता गोरखपुर मंडल अध्यक्ष गोविंद जी श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने किया। मुख्य अतिथि रूपेश कुमार श्रीवास्तव और विशेष अतिथि विनोद राय (पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री) मौजूद रहे।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- यूपीएस को पुरानी पेंशन जैसा बनाना: रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यूपीएस (Unified Pension Scheme) को पुरानी पेंशन स्कीम की तरह हूबहू लागू नहीं किया गया तो कर्मचारी इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
- आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर: कर्मचारियों ने 3.86 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है। इस पर सरकार से बातचीत जारी है।
- पेंशनर्स के लिए लाभ: पेंशनर्स को आठवें वेतन आयोग का फायदा, 60-70-75 साल की उम्र में अतिरिक्त 5% डीए, रेलवे किराए में छूट।
- कोरोना काल के एरियर: कोरोना में फ्रीज किए गए डेढ़ साल के एरियर बहाल करना।
- अन्य मांगें: उत्तर प्रदेश सरकार से कोरोना काल में रोके गए
- भत्तों को बहाल करना और पुरानी पेंशन या यूपीएस लागू करना।
आंदोलन की चेतावनी और भविष्य की रणनीति
रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों के
लंबे संघर्ष की वजह से ही आठवां वेतन आयोग बन रहा है।
कामरेड शिवगोपाल मिश्रा और हरि किशोर तिवारी ने मिलकर आगे की रणनीति तैयार की है।
अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल बज जाएगा।
बैठक में मौजूद प्रमुख नेता
बैठक में पंडित श्याम नारायण शुक्ल, राजेश सिंह, अनिल द्विवेदी, बंटी श्रीवास्तव, राजेश मिश्रा, अनूप कुमार,
इंजीनियर सौरभ श्रीवास्तव, संतोष सिंह, देवेश सिंह, दीपक चौधरी,
इजहार अली, मिथिलेश तिवारी सहित कई अन्य कर्मचारी नेता शामिल हुए।
फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। अगर बात नहीं बनी,
तो आने वाले दिनों में बड़ा प्रदर्शन या हड़ताल देखने को मिल सकता है।
कर्मचारियों की एकता इस बार मजबूत नजर आ रही है!

