बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को 13वीं संसदीय चुनाव हो रहे हैं। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद पहला बड़ा चुनाव है, जिसमें शेख हसीना की 15 साल की सत्ता समाप्त हुई। हसीना भारत में निर्वासित हैं और उनकी पार्टी आवामी लीग को राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद उनकी पार्टी बीएनपी की कमान उनके बेटे तारिक रहमान संभाल रहे हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने चुनाव को ‘नए बांग्लादेश का जन्मदिन’ बताया है। साथ ही संवैधानिक सुधारों पर रेफरेंडम भी चल रहा है।
मौजूदा परिदृश्य और चुनावी ढांचा
चुनाव अंतरिम सरकार के तहत हो रहे हैं, जो 2024 के बाद से सत्ता में है। 127 मिलियन से अधिक मतदाता 299 सीटों (एक सीट पर मतदान रद्द) के लिए वोट डाल रहे हैं। पोलिंग सुबह 7:30 से शाम 4:30 तक। कुल 1,981 उम्मीदवार मैदान में हैं। 51 राजनीतिक दल चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला दो गठबंधनों के बीच है। चुनाव आयोग ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की है। साथ ही जुलाई चार्टर पर रेफरेंडम से संवैधानिक, चुनावी और संस्थागत सुधारों को मंजूरी मिल सकती है।
प्रमुख राजनीतिक दल और गठबंधन
- बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी): तारिक रहमान के नेतृत्व में सबसे मजबूत दावेदार। पूर्व सहयोगी खालिदा जिया के निधन के बाद नई ऊर्जा।
- जमात-ए-इस्लामी: शफीकुर रहमान के नेतृत्व में 11 दलों का गठबंधन। इस्लामी विचारधारा पर फोकस।
- अन्य: नेशनल सिटिजंस पार्टी (एनसीपी) जैसे नए युवा-आधारित दल, जो 2024 विद्रोह में सक्रिय थे। जतिया पार्टी स्वतंत्र लड़ रही है। आवामी लीग पूरी तरह बाहर है, जो पिछले चार चुनाव जीत चुकी थी।
बीते चुनावों के नतीजे और अब का अंतर
2024 का चुनाव विवादास्पद था। आवामी लीग ने बहुमत जीता, लेकिन बीएनपी ने बहिष्कार किया और मतदान मात्र 27% रहा। हसीना पर धांधली, विरोधियों पर दमन के आरोप थे। अब स्थिति पूरी तरह बदली है:
- आवामी लीग प्रतिबंधित, हसीना निर्वासित।
- कोई एकतरफा चुनाव नहीं; बीएनपी और जमात मुख्य प्रतिद्वंद्वी।
- छात्र आंदोलन से लोकतंत्र की बहाली का माहौल।
- रेफरेंडम से सुधारों पर जनमत।
- नए चेहरे और गठबंधन की एंट्री से राजनीति में विविधता।
हिंदुओं के पास क्या विकल्प?
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक (लगभग 8-10%) हैं। हसीना के शासन में उन्हें कुछ सुरक्षा मिली,
लेकिन 2024 विद्रोह के दौरान कई हमले हुए।
अब बीएनपी और जमात मुख्य विकल्प हैं। बीएनपी को अधिक धर्मनिरपेक्ष माना जाता है, जबकि जमात इस्लामी है,
जिससे हिंदुओं में चिंता है। नए दल जैसे एनसीपी में युवा शामिल हैं, जो समावेशी नीतियां ला सकते हैं।
हिंदू समुदाय के लिए मुख्य विकल्प बीएनपी-समर्थित उम्मीदवार या स्वतंत्र हैं,
जो अल्पसंख्यक सुरक्षा पर फोकस करें। चुनाव परिणाम से अल्पसंख्यक नीतियां प्रभावित होंगी।
बांग्लादेश चुनाव 2026 लोकतंत्र की बहाली का ऐतिहासिक मौका है। हसीना युग का अंत, आवामी लीग का प्रतिबंध और
नए गठबंधनों से राजनीति नई दिशा में। बीएनपी को बढ़त दिख रही है, लेकिन रेफरेंडम और परिणाम भविष्य तय करेंगे।
हिंदू समुदाय के लिए स्थिरता और सुरक्षा महत्वपूर्ण। यह चुनाव नए बांग्लादेश की नींव रखेगा।

