मिर्जापुर में गिरफ्तारी की घटना मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश), 4 जनवरी 2026: भाकपा-माले (CPI-ML Liberation) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव और केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड सुधाकर यादव की गिरफ्तारी को पार्टी ने लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला करार दिया है। पार्टी के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह अलोकतांत्रिक, अन्यायपूर्ण और दमनकारी है। गिरफ्तारी के साथ ही राज्य कमेटी सदस्य जीरा भारती को भी हिरासत में लिया गया है।
बिना वारंट हिरासत में लिया गया
पार्टी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 3:30 बजे चुनार के अदलहट थाना क्षेत्र में दोनों नेताओं को बिना किसी गिरफ्तारी वारंट या कारण बताए पुलिस ने रोक लिया। वे वाराणसी में एक साथी के अंतिम संस्कार से लौट रहे थे। पार्टी का आरोप है कि यह गिरफ्तारी मिर्जापुर जिले में आदिवासी बस्तियों पर वन विभाग की बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ चल रहे संघर्ष को दबाने की साजिश है।
आदिवासी अधिकारों पर हमला
भाकपा-माले के जिला सचिव राकेश सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि आदिवासी समुदाय फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्षरत है।
वन विभाग बिना नोटिस या ठोस आधार के खड़ी फसलों को नष्ट कर रहा है और बस्तियों पर बुलडोजर चला रहा है।
टेंदुआ खुर्द जैसी जगहों पर ऐसी कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश है।
महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की भी शिकायतें आई हैं।
पार्टी की प्रमुख मांगें
पार्टी ने मांग की है कि:
- राज्य सचिव सुधाकर यादव और जीरा भारती सहित सभी गिरफ्तार साथियों को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए।
- आदिवासी बस्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई तुरंत रोकी जाए।
- जन आंदोलनों पर दमन बंद किया जाए।
राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी पार्टी ने चेतावनी दी है
कि यदि सरकार और प्रशासन ने दमनकारी रवैया नहीं छोड़ा तो राज्यव्यापी विरोध आंदोलन तेज किया जाएगा,
जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

