विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ प्र ने कहा है कि बिजली वितरण निगमों के काम में लगातार सुधार हो रहा है और महाकुंभ में बिजली कर्मियों ने श्रेष्ठतम प्रदर्शन कर पूरे देश को चकित कर दिया है.
इसके बावजूद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा आज पुनः विधान परिषद में बिजली के निजीकरण के पक्ष में दिया गया वक्तव्य दुर्भाग्यपूर्ण है.
ऊर्जा मंत्री के इस वक्तव्य से बिजली व्यवस्था सुधार ने लगे बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है. संघर्ष समिति के पदाधिकारियों जितेन्द्र कुमार गुप्त, जीवेश नन्दन,
राघवेन्द्र साहू, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, ब्रजेश त्रिपाठी, प्रवीण कुमार, राकेश चौरसिया राजकुमार सागर, संदीप श्रीवास्तव, विजय बहादुर सिंह, पीके श्रीवास्तव सतेंद्र मौर्य,
रामशरन, पवन सिंह, विकास राज श्रीवास्तव, पीयूष राज श्रीवास्तव, सरोजनी सिंह, ओम गुप्ता, सत्यव्रत पाण्डेय सुजीत कुमार विनय, संजय, दिलीप कुमार एवं करुणेश त्रिपाठी ने कहा कि
“विकसित भारत के लिए बिजली का निजीकरण नहीं अपितु सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली उद्योग को रखा जाना प्राथमिक आवश्यकता है क्योंकि निजी क्षेत्र के लिए बिजली एक व्यापार है और सार्वजनिक क्षेत्र के लिए बिजली एक सेवा है.”
आगरा में टोरेंट कंपनी का प्रयोग इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. ऊर्जा मंत्री द्वारा सदन में यह बताना चाहिए था कि टोरेंट को प्रति यूनिट बिजली किस रेट में प्राप्त हो रही है और कंपनी द्वारा पॉवर कॉर्पोरशन को प्रति यूनिट कितना राजस्व दिया जा रहा है?
विगत वर्ष 2023-24 में इस कारण हुए 275 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई कैसे की जाएगी? जबकि कम्पनी द्वारा आगरा में बिजली बेंच कर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा फिर कैसे कमाया?
यदि निजीकरण के इस प्रयोग की सही समय पर समीक्षा होती तो एक साल में पॉवर कॉर्पोरशन को 1,000 करोड़ का मुनाफा होता. विगत 15 वर्षों में सिर्फ आगरा के निजीकरण से ही पॉवर कॉर्पोरशन को हजारों करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है.
पदाधिकारियों ने आगे कहा कि सदन के वर्तमान सत्र में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार की मुक्तकंठ से प्रशंसा हर स्तर से हो रही है और भारत सरकार द्वारा जारी की गई
विद्युत वितरण कंपनियों की रेटिंग की रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार सुधार हो रहा है.
उत्तर प्रदेश में आरडीएसएस स्कीम के अंतर्गत विद्युत वितरण निगमों का नेटवर्क सुधारने के लिए हजारों करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं. इससे हो रहे सुधार और बिजलीकर्मियों के परिश्रम का परिणाम है कि
विद्युत वितरण निगम लगातार सुधार की ओर बढ़ रहे हैं फिर इन सब परिणामों के बावजूद निजीकरण क्यों? बता दें कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने वर्ष 2023 – 24 में प्रति यूनिट
बिजली विक्रय कर रु 04.47 प्रति यूनिट राजस्व वसूली की है जो आगरा शहर में टोरेंट पॉवर कंपनी से मिलने वाले राजस्व रु0 4.36 प्रति यूनिट से अधिक है, आगरा एक औद्योगिक शहर है.
आगरा में एशिया का सबसे बड़ा चमड़ा उद्योग है और आगरा में सबसे अधिक पांच सितारा होटल है. दूसरी और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत बुंदेलखंड और चंबल का क्षेत्र आता है और अनेक गांव आते हैं.
इन स्थानों पर बिजली का राजस्व बहुत कम है, इसके बावजूद दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से टोरेंट पावर कंपनी की तुलना में प्रति यूनिट अधिक राजस्व मिल रहा है.
संघर्ष समिति गोरखपुर के संयोजक पुष्पेन्द्र सिंह ने कहा कि महाकुंभ में बिना सोए दिन रात बिजली कर्मी परिश्रम कर रहे हैं. संघर्ष समिति ने प्रयागराज के बिजली कर्मचारियों को विगत 5 जनवरी को हुई बिजली महापंचायत में शपथ दिलाई थी कि वे महाकुंभ में श्रेष्ठतम प्रदर्शन करेंगे.
महाकुंभ में कार्यरत बिजली कर्मियों ने इसे सिद्ध कर दिया है और महाकुंभ की बिजली व्यवस्था ने सारे देश को चकित कर दिया है.
संघर्ष समिति गोरखपुर के संरक्षक इस्माइल खान ने कहा कि
उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में लगातार सुधार में लगे हैं. बिजली कर्मचारियों के प्रयासों को अनदेखा कर जिस प्रकार निजीकरण की प्रक्रिया
तेज की जा रही है, उससे बिजली कर्मचारियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. आज लगातार 89वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रान्त भर में जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर विरोध सभा की.

