मगर सबसे बड़ा ब्लंडर किया CAG विनोद राय ने, किसके इशारे पर समझा जा सकता है। 2010 मे CAG विनोद राय ने अपनी एक रिपोर्ट में 2G स्पेक्ट्रम आवंटन से केन्द्र सरकार के खजाने से 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की बात कही.
इधर बाबा रामदेव उभर रहे थे और योग के मंच से कालेधन, भ्रष्टाचार और इनकमटैक्स माफ़ करने के लंबे लंबे सपने दिखाना शुरू कर चुके थे और चार जून 2011 को दिल्ली के रामलीला मैदान में
योग कराने के लिए परमिशन लेकर राजनीतिक गतिविधियां करने के आरोप में पुलिस ने उनके शिविर पर हमला बोल दिया और रामदेव महिला वस्त्र पहन कर फरार हो गया.
इसके बाद CAG विनोद राय ने फिर एक नकली बम फोड़ा और कोयला आवंटन में कई लाख करोड़ के घोटाले का दावा किया. माहौल पूरी तरह बन गया था और संघ ने महाराष्ट्र के रालेसिद्धी में रह रहे 80 साल के
एक व्यक्ति अनशन स्पेशलिस्ट “अन्ना हजारे” को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के लिए तैयार किया और इसके इर्द-गिर्द संघ के विवेकानंद इंटरनैशनल फाउंडेशन से जुड़े तमाम लोग,
जैसे कुमार विश्वास, राम जेठमलानी, लामबंद होने लगे और मेधा पाटेकर, किरण बेदी , स्वामी अग्निवेश, कर्नल देवेन्द्र शेरावत , सुनीता गोदारा, हर्ष मंदर, जस्टिस तेवतिया, पीवी राजगोपाल, अनुपम खेर जैसे लोगों को तैयार कराया गया.
अन्ना आंदोलन की रूपरेखा तैयार थी और इस पूरे परिदृश्य में विवेकानंद इंटरनैशनल फाउंडेशन और संघ पीछे से सपोर्ट कर रहा था , अजित डोभाल इस पूरी स्क्रिप्ट के लेखक थे.
मंच पर अन्ना के पीछे जो बैकड्रॉप था उसमें “भारत माता” की फोटो लगाई गयी. यह चित्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हर कार्यक्रम के बैकड्रॉप में होती ही है.
अन्ना आंदोलन कहीं संघ का कार्यक्रम ना हो जाए इसलिए रातों रात भारत माता के बैकड्रॉप को नोचा गया और उसकी जगह महात्मा गांधी के चित्र का बैकड्रॉप लगाकर अन्ना को “दूसरा गांधी” के ब्रांड नेम से प्रचारित किया जाने लगा.
इसमें रवीश कुमार और उनके शो “प्राइम टाइम” के साथ साथ 24X7 प्रसारित होने वाले सारे न्यूज़ चैनल और समाचार पत्र थे. बाद में जब मंच सज गया तो प्रशान्त भूषण, दिल्ली के आर्कशिप और संतोष हेगड़े, अभिनेता आमिर खान जैसे लोग जुड़े.
इसके साथ ही संघ के खेल से अंजान तमाम लोग अपनी अपनी नौकरी छोड़ कर देश को भ्रष्टाचार मुक्त कराने की अन्ना की मुहिम में जुड़ गए। मनीष सिसोदिया ज़हरीले ज़ी न्यूज़ को तो आशुतोष टीवी18 को छोड़ कर अरविंद केजरीवाल से जुड़ गए.
अन्ना हजारे उस मंच के अनशनकारी थे तो अरविंद केजरीवाल उस मंच के प्रमुख चेहरा. इसमें मंच से जिस “सुपर शक्ति” जनलोकपाल की मांग की गयी वह प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, सेना के सेनाध्यक्ष सबसे ऊपर की शक्ति थी.
इस शक्ति को ऐसे प्रचारित और प्रसारित किया गया जैसे वह कोई देवता हो और जहां कहीं देश में गलत काम होगा उसे झट से पकड़ लेगा. जबकि हकीकत यह है कि उस जनलोकपाल ने अपनी स्थापना से आजतक एक चूहिया भी नहीं पकड़ा जबकि अरविंद केजरीवाल खुद 11 साल मुख्यमंत्री थे.
इसी बीच दिल्ली के मुनिरका में 16 दिसंबर 2012 को एक चलती बस में निर्भया का बलात्कार हुआ, संघ ने इसे फिर लपका और इंडिया गेट पर लोग इकट्ठे होने लगे.
धीरे धीरे निर्भया बलात्कार का विरोध प्रदर्शन पूरे देश में होने लगा, किसने कराया समझा जा सकता है, वही जो पिछले 11 साल से देश की हर बुरी खबर पर चुप्पी साधे रहता है.
निर्भया बलात्कार और देवता स्वरूप जनलोकपाल की गूंज के बीच डाक्टर मनमोहन सिंह की सरकार के विरुद्ध ऐसी नाउम्मीद फैली कि इसी वातावरण में नरेंद्र मोदी का उदय हुआ, गुजरात विधानसभा चुनाव जीतते ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया गया.
नरेंद्र मोदी के तमाम अविश्वसनीय वादों को इसी अविश्वसनीय वातावरण में सच माना जाने लगा. अब अन्ना हजारे ऐंड गिरोह का काम खत्म हो चुका था, सबको वापस जाने का इशारा कर दिया गया.
मगर अरविंद केजरीवाल को लगा कि माहोल हमने बनाया और फसल नरेन्द्र मोदी काटेंगे. वह ठन गये और “आम आदमी पार्टी” बना ली और दिल्ली के 2015 अगले चुनाव के बाद सरकार बना ली.
शुरू में संघ को अरविंद केजरीवाल की यह बात बहुत बुरी लगी मगर संघ ने उनसे फिर सेटिंग की और दिल्ली की सत्ता की कीमत पर विरोधी एकता को बिखेरने का खेल खेलने का काम दे दिया.
इसी क्रम में गोवा, गुजरात, हरियाणा का चुनाव केजरीवाल ने लड़ा और भाजपा के विरोधी वोटों को बिखेर कर उन्हें सत्ता दिला दी , INDIA गठबंधन में नाराज़ फूफ़ा बन कर भी पूरे गठबंधन का क्रियाकर्म कर दिया।
कलांतर में 2G स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला , Coal आवंटन घोटाला अदालत में बकवास सिद्ध हुए और जनलोकपाल फुस्स साबित हुआ… विनोद राय, किरन बेदी इत्यादि को
बड़े पद देकर सम्मानित किया गया, रामदेव देश के सबसे बड़े व्यापारी बन गये. नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री और अजित डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार.
बाकी सब इतिहास आपके सामने है ….
(DISCLAIMER-सौजन्य से INDIA AGAINST CORRUPTION, गोरखपुर हलचल का इससे कोई सरोकार नहीं है)

