दुनिया भर में जारी तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच आखिरकार सीजफायर (युद्ध विराम) की खबर सामने आई, जिसने करोड़ों लोगों को राहत दी। जैसे ही यह सूचना फैली, लोगों के चेहरे पर सुकून और उम्मीद की चमक दिखाई देने लगी।
पूर्वांचल के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संपूर्णानंद मल्ल (पूर्वांचल गांधी) ने इस ऐतिहासिक पल पर गहरी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि मानवता की जीत है।
“दिल से दुआ, अब युद्ध नहीं होने देंगे”
डॉ. मल्ल ने बताया कि वह पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे, लेकिन जैसे ही सीजफायर की खबर मिली, उन्हें नई ऊर्जा मिली।
उन्होंने कहा: “ऐसा लगा जैसे मरता हुआ जीवन फिर से जीवित हो गया… बच्चों की चीखें, लोगों की बेबसी अब थम जाएगी।”
कुशीनगर से उठी शांति की आवाज
आपको बताते चलें कि 1 मार्च से कुशीनगर की पवित्र धरती से शांति का संदेश लगातार उठ रहा था। बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर आयोजित पत्रकार सम्मेलन के बाद, डॉ. मल्ल ने: राष्ट्रपति से “शांति दल” भेजने की अपील की
विश्व नेताओं को लगातार पत्र लिखे
3 अप्रैल से “शांति सत्याग्रह” की शुरुआत की हालांकि शुरुआत में उन्हें हाउस अरेस्ट भी किया गया, लेकिन 4 अप्रैल को वह कुशीनगर पहुंचे और भिक्षु संघ व स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कैंडल मार्च और शांति वार्ता का आयोजन किया गया।
कई लोगों के सामूहिक प्रयास से इस अभियान में भिक्षु संघ, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, युवा और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर शांति की आवाज बुलंद की।
डॉ. मल्ल ने सभी सहयोगियों, मीडिया संस्थानों और अनजान लोगों तक का धन्यवाद करते हुए कहा: “न जाने किसके प्रयास से यह युद्ध रुका… लेकिन यह मानवता की सामूहिक जीत है।”
मेरा तो एक ही लक्ष्य है— “युद्ध रहित वसुंधरा” सीजफायर के बाद डॉ. मल्ल ने एक बड़ा संकल्प लिया. “अब हम ‘युद्ध रहित पृथ्वी’ के लिए काम करेंगे।” उन्होंने सवाल उठाया: “जब इंसान हथियार लेकर पैदा नहीं होता, तो फिर युद्ध क्यों?”
निष्कर्ष के रूप में यही कहा जा सकता है कि मानवता जीती, उम्मीद जिंदा क्योंकि यह सीजफायर सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए उम्मीद की नई किरण है।
अब चुनौती है — इस शांति को स्थायी बनाना।


