पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल का पीएम मोदी को खुला पत्र: 19 अप्रैल को संसद के सामने “अहिंसक इंकलाब” की घोषणा

गोरखपुर के पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल गोरखपुर के पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल

गोरखपुर से उठी अहिंसक क्रांति की पुकार

गोरखपुर के शांतिवन शोध पुस्तकालय, सत्यपथ, गोविंद नगरी (थाना शाहपुर) से पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए 19 अप्रैल 2026 को संसद के सामने “अहिंसक इंकलाब” की घोषणा की है। पत्र में “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा देते हुए कहा गया है कि भारत को अब “रिवॉल्यूशन” ही बचा सकता है। यह घटनाक्रम राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

पत्र का मुख्य संदेश: सरकार की नीतियों पर तीखा हमला

डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने पत्र में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और सामाजिक विभाजन जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति बदतर हो रही है और आम जनता पर बोझ बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से टैक्स व्यवस्था, पेट्रोल-डीजल-गैस सिलेंडर की ऊंची कीमतों और जीएसटी को निशाने पर लिया गया है। उन्होंने मांग की है कि आटा, दाल, तेल, दूध, दवा, शिक्षा, चिकित्सा और रेल सेवाओं पर जीएसटी पूरी तरह समाप्त किया जाए।

पत्र में अग्निवीर योजना को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। डॉ. मल्ल ने पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की है, ताकि युवाओं को स्थायी रोजगार मिल सके। साथ ही बंद पड़े स्कूलों को फिर से चालू करने, बेरोजगारों को रोजगार देने और गरीब-अमीर सभी के लिए समान शिक्षा, चिकित्सा तथा रेल सुविधा की मांग की गई है।

PMO स्थानांतरण और ‘सेवाभाव’ पर गहरा सवाल

पत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 13 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आखिरी बैठक साउथ ब्लॉक में होने और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए ‘सेवातीर्थ’ में स्थानांतरण पर केंद्रित है। डॉ. मल्ल ने इसे शासन की सोच और संस्कृति में बदलाव का प्रतीक बताते हुए पूछा है – क्या अब ‘सत्ताभाव’ की जगह ‘सेवाभाव’ को प्राथमिकता दी जाएगी? उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या वाकई सेवाभाव अपनाया जा रहा है या सिर्फ नाम का है।

कार्यक्रम की रूपरेखा: 14 और 19 अप्रैल के आयोजन

डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने पत्र में 14 अप्रैल 2026 को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर संसद के सामने

विशेष कार्यक्रम का उल्लेख किया है। इसके बाद 19 अप्रैल को “सत्य और अहिंसा” के सिद्धांतों पर आधारित अहिंसक

इंकलाब की घोषणा की जाएगी। यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित रहेगा।

पत्र की व्यापक पहुंच और प्रतिलिपि

पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, गृह मंत्री, विभिन्न राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों,

सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को भी भेजी गई है।

इससे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास स्पष्ट है। डॉ. मल्ल का यह कदम पूर्वांचल में

सामाजिक जागृति और गांधीवादी मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं

यह खुला पत्र केंद्र सरकार की नीतियों पर सीधा हमला है और अहिंसक तरीके से बदलाव की मांग करता है।

गोरखपुर जैसे क्षेत्र से उठी यह आवाज दलित, पिछड़े और आम जनता के बीच गूंज सकती है।

अब सवाल यह है कि सरकार या प्रशासन की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है? क्या यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर फैलेगा या स्थानीय स्तर पर ही सीमित रहेगा? समय बताएगा, लेकिन डॉ. संपूर्णानंद मल्ल की यह पहल अहिंसक क्रांति की नई शुरुआत साबित हो सकती है।

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