अरुण निषाद हत्याकांड: बसपा प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात, 50 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चिलुआताल थाना क्षेत्र के ग्राम तेनुहिया (तेनुही) में 15 फरवरी 2026 को हुई अरुण निषाद हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। 22 वर्षीय युवक अरुण निषाद की पुरानी रंजिश के चलते दोस्तों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पुलिस और ग्रामीणों के बीच टकराव हुआ, जिसमें कई लोग घायल हुए। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाते हुए पीड़ित परिवार का साथ दिया है।

घटना का पूरा विवरण

15 फरवरी 2026 की शाम को अरुण निषाद (पुत्र भोला निषाद) को उनके कथित दोस्त विशाल और देवेंद्र सहित अन्य युवकों ने किसी बहाने घर से बुलाया। ग्रामीणों के अनुसार, पुरानी रंजिश के कारण उन्हें मैदान में ले जाकर गोली मार दी गई। सिर में गोली लगने से अरुण गंभीर रूप से घायल हो गए और गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने हाइवे जाम कर दिया और आक्रोशित होकर आरोपी के घर में तोड़फोड़ की। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।

पुलिस पर पीड़ितों पर लाठीचार्ज का आरोप

हत्या के विरोध में जब परिवार और ग्रामीण न्याय की मांग लेकर एकत्र हुए, तो पुलिस ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। पीड़ित परिवार के अनुसार:

  • कोइल का हाथ फ्रैक्चर हो गया।
  • संजू देवी, ज्ञानमती देवी, मंजू देवी, कानी देवी और आदित्य निषाद के सिर में गंभीर चोटें आईं।

परिवार ने कहा कि जब मुख्यमंत्री के गृह जनपद के आसपास भी लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो राज्य की अन्य जगहों की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। इस घटना ने यूपी में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बसपा का प्रतिनिधिमंडल और मांगें

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमारी मायावती के निर्देश पर 17 फरवरी 2026 को बसपा का एक प्रतिनिधिमंडल ग्राम तेनुही पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जिला अध्यक्ष हरि प्रकाश निषाद ने किया। टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की, उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया और दुख में साथ देने का वादा किया।

बसपा की प्रमुख मांगें:

  • मुख्य आरोपी सहित सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी।
  • पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा।
  • परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
  • परिवार को स्थायी सुरक्षा प्रदान करना।

जिलाध्यक्ष हरि प्रकाश निषाद ने कहा, “जब तक पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता,

बसपा इस दुख की घड़ी में चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहेगी।”

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य

प्रतिनिधिमंडल में कमलेश कुमार गौतम (मुख्य मंडल प्रभारी), घनश्याम राही, जितेंद्र कुमार नीरज,

वीरेंद्र पांडे (जिला उपाध्यक्ष), नवल किशोर नथनी, अमित चंद्र गौतम, रामप्रीत दूसिया,

झिनक निषाद (पार्षद प्रतिनिधि), सावन कुमार, इमरन अंसारी, अनिल प्रताप बौद्ध,

सुरेंद्र प्रसाद, पवन त्यागी, लक्ष्मण प्रसाद सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

न्याय की प्रतीक्षा

यह हत्याकांड न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है,

बल्कि ग्रामीण इलाकों में बढ़ते अपराध और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाता है।

बसपा की सक्रियता से पीड़ित परिवार को राजनीतिक समर्थन मिला है, लेकिन अब प्रशासन पर निर्भर है कि

वह मांगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है। क्या पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा? यह देखना बाकी है।

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