शिक्षा सुधार का माध्यम बनी जेल व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में जेलों को अब सिर्फ सजा देने की जगह नहीं, बल्कि सुधार और शिक्षा का केंद्र भी माना जा रहा है। गोरखपुर जिला कारागार में बंद इन 22 कैदियों ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट (12वीं कक्षा) की परीक्षा देने का फैसला किया है। ये कैदी पिछले कुछ समय से जेल के अंदर ही पढ़ाई कर रहे थे। जेल अधीक्षक और स्टाफ ने उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग किया, जिसमें किताबें, अध्ययन सामग्री और समय प्रदान करना शामिल है।
यह कदम जेल सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है। यूपी सरकार और जेल विभाग की ओर से कैदियों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास सराहनीय है। इससे न केवल कैदियों का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि रिहाई के बाद वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।
परीक्षा के लिए विशेष इंतजाम
जिला कारागार परिसर में ही एक विशेष परीक्षा हॉल तैयार किया गया है। यहां सीसीटीवी कैमरा, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। कैदियों को परीक्षा के दौरान कोई असुविधा न हो, इसके लिए अलग से बैठने की व्यवस्था, समय पर प्रश्न पत्र वितरण और उत्तर पुस्तिकाओं का संग्रह सुनिश्चित किया गया है।
परीक्षा के दौरान जेल स्टाफ और बाहरी पर्यवेक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षाएं फरवरी-मार्च में चल रही हैं, और गोरखपुर जेल में यह व्यवस्था इसी क्रम में की गई है।
कैदियों की पढ़ाई: एक प्रेरणादायक कहानी
ये 22 कैदी विभिन्न अपराधों के आरोपी या दोषी हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जेल में रहते हुए उन्होंने सेल्फ स्टडी की और कुछ ने जेल द्वारा चलाए गए शिक्षा कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। जेल में साक्षरता अभियान और दूरस्थ शिक्षा के जरिए कई कैदी 10वीं और 12वीं की तैयारी कर रहे हैं। गोरखपुर जिला कारागार में यह संख्या
इस वर्ष सबसे अधिक है, जो जेल प्रशासन की मेहनत को दर्शाता है।
पिछले वर्षों में भी यूपी की जेलों से परीक्षा देने वाले
कैदियों का पास प्रतिशत राज्य औसत से बेहतर रहा है।
2025 में कई जेलों के कैदियों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए थे।
यह दिखाता है कि शिक्षा से सुधार संभव है।
समाज के लिए संदेश
यह खबर हमें बताती है कि गलती करने वाला व्यक्ति हमेशा गलत नहीं रहता। शिक्षा के माध्यम से
वह अपनी जिंदगी बदल सकता है। जेल में शिक्षा कार्यक्रम न केवल
कैदियों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए फायदेमंद हैं।
इससे पुनरावृत्ति अपराध (recidivism) कम होता है और समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।
गोरखपुर जिला कारागार का यह प्रयास अन्य जेलों के लिए भी मिसाल बनेगा। उम्मीद है कि
ऐसे और कैदी आगे आएंगे और शिक्षा के बल पर नई शुरुआत करेंगे।
शिक्षा सबके लिए है – चाहे वह जेल के भीतर हो या बाहर!

