घटना का विवरण: ऑपरेशन के बाद फैला संक्रमण
उत्तर प्रदेश के सिकरीगंज में स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद गंभीर संक्रमण फैल गया, जिसके कारण कई मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई। अब तक कुल 8 मरीज प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 5 की आंखें निकालनी पड़ीं। दो और मरीजों की हाल ही में आंखें निकाली गई हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। संक्रमण इतना खतरनाक था कि मरीजों की दृष्टि पूरी तरह प्रभावित हो गई और डॉक्टरों को आंखें निकालने का कठोर फैसला लेना पड़ा। यह घटना अस्पताल की सर्जिकल प्रक्रिया, साफ-सफाई और स्टेरिलाइजेशन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जांच कमेटी का गठन और प्रगति
जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेश झा ने इस गंभीर लापरवाही के मामले में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी ने शुक्रवार को अस्पताल के संचालक, डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। बताया जा रहा है कि सभी ने अलग-अलग और परस्पर विरोधी जवाब दिए हैं। कुछ ने ऑपरेशन थिएटर की सफाई पर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने उपकरणों की स्टेरिलाइजेशन प्रक्रिया को दोष दिया। संचालक ने दावा किया कि सभी प्रोटोकॉल फॉलो किए गए थे, लेकिन कमेटी के सदस्यों ने इसे संतोषजनक नहीं माना। जांच में अस्पताल के रिकॉर्ड, ऑपरेशन थिएटर की रिपोर्ट और मरीजों के मेडिकल हिस्ट्री की जांच की जा रही है।
मरीजों की स्थिति और प्रभाव
प्रभावित 8 मरीजों में से 5 की आंखें निकाल दी गई हैं, जबकि बाकी तीन की रोशनी भी लगभग चली गई है। दो नए मामलों में भी संक्रमण इतना बढ़ गया कि आंखें निकालनी पड़ीं। मरीजों के परिवारों में गुस्सा और दुख है। कई परिवारों ने अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और मुआवजे की मांग की है। यह घटना सिकरीगंज और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल पैदा कर रही है। लोग अब छोटे-मोटे अस्पतालों में सर्जरी से डरने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्ट-ऑपरेटिव इंफेक्शन आमतौर पर स्टेरिलाइजेशन की कमी या अनुचित एंटीबायोटिक उपयोग से फैलता है।
अस्पताल की जिम्मेदारी और संभावित कारण
न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, इंजेक्शन और ऑपरेशन थिएटर की सफाई पर सवाल उठ रहे हैं। जांच कमेटी के प्रारंभिक निष्कर्षों में संकेत मिला है कि संक्रमण बैक्टीरियल या फंगल हो सकता है, जो सर्जरी के दौरान या बाद में फैला।
अस्पताल संचालक ने दावा किया कि सभी स्टैंडर्ड प्रक्रियाएं अपनाई गईं,
लेकिन मरीजों के परिवार और स्थानीय लोग इसे लापरवाही मान रहे हैं।
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य के कदम
जिला प्रशासन ने अस्पताल की जांच तेज कर दी है। कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द जमा करेगी,
जिसके आधार पर अस्पताल की लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने या
आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का फैसला हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मरीजों को उच्च
अस्पतालों में रेफर किया है और उनके इलाज का खर्च उठाने का आश्वासन दिया है। यह मामला यूपी में
मेडिकल नेग्लिजेंस के खिलाफ सख्त नीति की मांग को बढ़ा रहा है।

