उत्तर प्रदेश: संभल हिंसा मामले में पूर्व डीएसपी अनुज चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सीजेएम आदेश पर लगाई रोक

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संभल हिंसा मामले में बड़ा ट्विस्ट: हाईकोर्ट से अनुज चौधरी को राहत

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नवंबर 2024 की हिंसा के मामले में पूर्व डीएसपी (वर्तमान एएसपी) अनुज चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने संभल की सीजेएम कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें अनुज चौधरी समेत 20-22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश था। यह आदेश 9 जनवरी 2026 को चंदौसी सीजेएम विभांशु सुधीर ने पारित किया था। अब मामले की अगली सुनवाई 5 सप्ताह बाद होगी।

घटना का पृष्ठभूमि और आरोप

संभल हिंसा 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई थी। इस दौरान पुलिस फायरिंग में कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत हो गई। एक पीड़ित यामीन के पिता ने अर्जी देकर आरोप लगाया कि उनके बेटे मोहम्मद आलम पर पुलिस ने जानबूझकर गोली चलाई। इस आधार पर सीजेएम कोर्ट ने अनुज चौधरी (तत्कालीन सीओ/डीएसपी), तत्कालीन कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

आदेश में कहा गया कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, इसलिए मजिस्ट्रेट ने सीधे निर्देश दिए। इस आदेश के बाद अनुज चौधरी और यूपी सरकार ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर हाईकोर्ट में चुनौती दी। पुलिस का कहना था कि पहले से न्यायिक जांच चल रही है और सीजेएम ने बीएनएसएस की धारा 175(4) जैसे अनिवार्य प्रावधानों की अनदेखी की।

हाईकोर्ट में सुनवाई और राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाओं पर हालिया सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अनुज चौधरी की ओर से वकीलों ने तर्क दिया कि आदेश गलत है और FIR दर्ज करने से पहले जांच जरूरी है। राज्य सरकार ने भी कहा कि सीजेएम ने नियमों का पालन नहीं किया।

हाईकोर्ट ने फिलहाल सीजेएम के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर

दर्ज करने की प्रक्रिया रुक गई है। कोर्ट ने मामले को विस्तृत सुनवाई के

लिए 5 सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया। इस दौरान पीड़ित पक्ष और सरकार दोनों अपनी दलीलें मजबूत कर सकेंगे।

पुलिस अधिकारी का करियर और विवाद

अनुज चौधरी संभल हिंसा के समय क्षेत्राधिकारी थे और बाद में प्रमोशन पाकर एएसपी बने।

वे वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात हैं। इस मामले में उनका नाम प्रमुखता से सामने आया था।

वहीं, FIR आदेश देने वाले सीजेएम विभांशु सुधीर का भी जल्द तबादला हो गया था, जिससे विवाद बढ़ा।

संभल हिंसा ने पूरे यूपी में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी थी। पुलिस का दावा है कि फायरिंग

कानून के अनुसार हुई, जबकि पीड़ित पक्ष न्याय की मांग कर रहा है। हाईकोर्ट का

यह फैसला पुलिस अधिकारियों के लिए राहत भरा है, लेकिन अंतिम फैसला सुनवाई के बाद आएगा।

यूपी में ऐसे मामले बढ़ते क्यों?

उत्तर प्रदेश में पुलिस और नागरिकों के बीच टकराव के कई मामले सामने आते हैं। संभल हिंसा

जैसी घटनाएं जांच, FIR और कोर्ट ऑर्डर के बीच विवाद पैदा करती हैं।

हाईकोर्ट का हस्तक्षेप ऐसे मामलों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश है।

यह मामला अब सभी की नजरों में है। क्या FIR होगी या आदेश रद्द होगा? अगली सुनवाई पर फैसला होगा। न्याय मिलने तक विवाद जारी रहेगा।

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