यूपी में सख्ती का दौर शुरू
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड न करने वाले 68 हजार से अधिक कर्मचारियों की सैलरी रोक दी गई है। यह फैसला पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा में संपत्ति विवरण जमा न करने वालों के प्रमोशन पर भी रोक लगेगी। यह कदम यूपी में सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फैसले का पूरा विवरण
यूपी सरकार ने सभी राज्य कर्मचारियों (ग्रुप ए, बी, सी और डी) के लिए मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपलोड करना अनिवार्य किया था। इसमें चल-अचल संपत्ति, बैंक बैलेंस, शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना-चांदी, वाहन और अन्य निवेश का पूरा ब्योरा देना जरूरी था। समयसीमा दिसंबर 2025 तक रखी गई थी।
जिन 68 हजार से अधिक कर्मचारियों ने यह काम नहीं किया, उनकी जनवरी 2026 की सैलरी रोक दी गई है। सैलरी रोकने का आदेश वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को जारी किया है। साथ ही इन कर्मचारियों के प्रमोशन, इंक्रीमेंट और अन्य लाभ भी प्रभावित होंगे। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर 15 फरवरी 2026 तक विवरण अपलोड नहीं किया गया, तो सैलरी रोक स्थायी हो सकती है और विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो सकती है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारी भ्रष्टाचार या काले धन को छिपाने की कोशिश कर सकते हैं। मानव संपदा पोर्टल पर रियल टाइम डेटा से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि आय से अधिक संपत्ति वाले मामलों की आसानी से जांच हो सकेगी। यह कदम लोकायुक्त और सतर्कता विभाग की सिफारिश पर उठाया गया है।
प्रदेश में करीब 22 लाख राज्य कर्मचारी हैं, जिनमें से लगभग 90% ने समय पर विवरण अपलोड कर दिया। बाकी 10% (68 हजार+) पर अब सख्ती बरती जा रही है। सरकार ने कहा है कि यह कोई नई नीति नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद नियमों का सख्ती से पालन है।
प्रभावित कर्मचारियों की स्थिति
जिनकी सैलरी रोकी गई है, उनमें क्लर्क, शिक्षक, पुलिसकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं। कई कर्मचारियों ने शिकायत की है कि तकनीकी समस्या या जागरूकता की कमी के कारण वे विवरण अपलोड नहीं कर पाए। कुछ ने कहा कि पोर्टल पर सर्वर डाउन होने से भी दिक्कत हुई। हालांकि सरकार ने कहा है कि जिन्होंने ईमानदारी से प्रयास किया और तकनीकी कारण से नहीं कर पाए, उनके मामले में छूट पर विचार किया जा सकता है।
सरकार की अपील और आगे की योजना
वित्त मंत्री ने सभी कर्मचारियों से अपील की है कि जल्द से जल्द
मानव संपदा पोर्टल पर लॉगिन कर संपत्ति विवरण अपलोड करें।
पोर्टल पर हेल्पलाइन नंबर और गाइडलाइन उपलब्ध हैं। सरकार ने कहा है कि
यह कार्रवाई केवल अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए है, न कि
किसी को परेशान करने के लिए।
भविष्य में हर साल संपत्ति विवरण अपडेट करना अनिवार्य होगा। जिन्होंने अभी तक नहीं किया,
उन्हें 15 फरवरी तक मौका दिया गया है। उसके बाद सख्त कार्रवाई होगी।
पारदर्शिता या सख्ती?
68 हजार कर्मचारियों की सैलरी रोकने का फैसला यूपी में
सरकारी तंत्र की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है।
यह भ्रष्टाचार रोकने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास है।
हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कुल मिलाकर यह फैसला राज्य में अनुशासन और ईमानदारी की नई मिसाल कायम कर सकता है।
कर्मचारियों को सलाह है कि जल्द से जल्द पोर्टल पर विवरण अपलोड करें, वरना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

