गोरखपुर में आशा वर्करों का बड़ा प्रदर्शन
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश आशा वर्कर यूनियन के आह्वान पर जिला अधिकारी कार्यालय पर आयोजित सभा में आशा वर्करों और आशा संगिनियों ने हुंकार भरी। सभा के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। यह ज्ञापन आशा वर्करों की लंबित मांगों को लेकर था, जिसमें राज्य कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतन, ईपीएफ-ईएसआई, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।
नेताओं ने की सरकार से सख्त मांग
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले राज्य स्थायी समिति के सदस्य राजेश साहनी ने कहा कि आशा वर्कर देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। सरकार उनसे स्थायी कर्मचारी जैसा काम लेती है, लेकिन उन्हें आज भी मात्र मानदेय पर रखा गया है। उन्होंने मांग की कि आशा वर्करों को अविलंब राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, न्यूनतम वेतन, ईपीएफ-ईएसआई, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
कोविड काल से लेकर अब तक आशा वर्करों ने जान जोखिम में डालकर काम किया, लेकिन बदले में उपेक्षा और असुरक्षा मिली। साहनी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
ऐक्टू और ऐपवा नेताओं का समर्थन
सभा का संचालन आल इंडिया काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) के गोरखपुर नेता विनोद भारद्वाज ने किया। उन्होंने कहा कि 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार आशा वर्करों को कर्मचारी का दर्जा देना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि कोई रियायत।
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला ऐसोसिएशन (ऐपवा) की राज्य कमेटी सदस्य मनोरमा चौहान ने इसे महिला श्रम के शोषण का सवाल बताया। उन्होंने कहा कि
महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली आशा वर्कर खुद सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं।
आशा वर्कर नेताओं की एकजुट आवाज
उत्तर प्रदेश आशा वर्कर यूनियन की संघर्ष समिति सदस्य मीनू प्रजापति, पुष्पा राय,
आशा गुप्ता, मालती कसोधन, अर्चना शुक्ला, सुधा शुक्ला, सुमन पाल तथा
विभिन्न ब्लॉकों की अध्यक्ष किरन साहनी (चरगांवा), राजदेई मौर्य (बड़हलगंज),
अंजू विश्वकर्मा, प्रेमशीला, नीरज मिश्रा, शकुंतला, चंद्रकांती सिंह (जंगल कौड़ियां),
अनिता मौर्य (बड़हलगंज), माया सिंह (उरूवा) ने संयुक्त रूप से कहा कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
9 फरवरी को लखनऊ मार्च का ऐलान
नेताओं ने घोषणा की कि 9 फरवरी को राज्य स्तर पर लखनऊ मार्च निकाला जाएगा। हजारों आशा वर्कर और संगिनियां
लखनऊ पहुंचकर सरकार पर अपनी मांगों को मनवाने का दबाव बनाएंगी। सभा में बड़ी संख्या में
आशा वर्कर और संगिनियां मौजूद रहीं और एकजुटता का प्रदर्शन किया।
आशा वर्करों की भूमिका और चुनौतियां
*आशा वर्कर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला हैं। वे टीकाकरण
, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, परिवार नियोजन और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कोविड महामारी में उन्होंने फ्रंटलाइन पर काम किया,
लेकिन मानदेय और सुरक्षा में कोई सुधार नहीं हुआ।
यह आंदोलन पूरे उत्तर प्रदेश में फैल रहा है और सरकार की नीतियों की परीक्षा ले रहा है।


