वाराणसी, 30 जनवरी 2026: काशी के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार को गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने के लिए 40 दिन का अल्टीमेटम दे दिया है। स्वामी जी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि यदि 40 दिनों के भीतर गाय को राज्यमाता का आधिकारिक दर्जा नहीं दिया गया, तो वे सभी संतों और धर्माचार्यों के साथ लखनऊ पहुंचकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह बयान वाराणसी में एक धार्मिक सभा के दौरान दिया गया, जिसने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान: गाय है राष्ट्र की मां
शंकराचार्य ने कहा, “गाय हमारी राज्यमाता है, राष्ट्रमाता है। यह सिर्फ पशु नहीं, हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और आध्यात्मिकता का आधार है। गौमाता को राज्यमाता का दर्जा देना सरकार का कर्तव्य है।” उन्होंने आगे कहा, “योगी सरकार ने गौ-संरक्षण के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि गाय को संवैधानिक और कानूनी दर्जा दिया जाए। 40 दिन का समय दिया जा रहा है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम लखनऊ में सभी संतों, महंतों और धर्मगुरुओं के साथ धरना-प्रदर्शन करेंगे।”
स्वामी जी ने गाय को ‘राष्ट्रमाता’ बताते हुए कहा कि गौहत्या रोकने के साथ-साथ गाय को सम्मानजनक दर्जा देना जरूरी है। उन्होंने गौशालाओं को राज्य संरक्षण, गाय के गोबर-मूत्र से बिजली और जैविक खाद उत्पादन जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया।
गाय को ‘राज्यमाता’ दर्जा देने की मांग: क्या है प्रस्ताव?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार एक अध्यादेश या कानून लाए, जिसमें गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा दिया जाए। इससे:
- गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और सख्त सजा।
- गौशालाओं को राज्य का संरक्षण और अनुदान।
- गाय के उत्पादों (दूध, गोबर, गोमूत्र) को बढ़ावा।
- स्कूलों में गौ-संरक्षण और उसके महत्व पर शिक्षा।
यह मांग हिंदू धर्मग्रंथों और संस्कृति पर आधारित है, जहां गाय को मां के समान माना जाता है। स्वामी जी ने कहा कि कई राज्यों में गाय को ‘माता’ का दर्जा दिया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे धार्मिक महत्व के राज्य में इसे ‘राज्यमाता’ का दर्जा मिलना चाहिए।
योगी सरकार पर दबाव, राजनीतिक प्रतिक्रिया
योगी आदित्यनाथ सरकार पहले से ही गौ-संरक्षण के लिए सख्त कानून और गौशालाओं को बढ़ावा दे रही है। लेकिन ‘
राज्यमाता’ दर्जे की मांग नई है और इसे लागू करना कानूनी और प्रशासनिक चुनौती हो सकती है।
संतों का यह अल्टीमेटम सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है।
विपक्षी दल इसे धार्मिक राजनीति से जोड़ रहे हैं, जबकि हिंदू संगठन और
गो-भक्त इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के
बयान से धार्मिक संगठनों में उत्साह है और कई संतों ने उनका समर्थन किया है।
40 दिन का अल्टीमेटम: क्या होगा आगे?
यदि सरकार 40 दिनों में कोई कदम नहीं उठाती, तो लखनऊ में संतों का बड़ा धरना-प्रदर्शन संभव है।
यह आंदोलन उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।
स्वामी जी ने कहा, “हम शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करेंगे,
लेकिन गौमाता के सम्मान के लिए पीछे नहीं हटेंगे।”
वाराणसी से लेकर पूरे प्रदेश में इस बयान की चर्चा है।
गाय को राज्यमाता का दर्जा मिलना या नहीं – यह 40 दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

