अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर अब और भी भव्य और विस्तृत होने जा रहा है। राम मंदिर के मुख्य गर्भगृह के अलावा परिसर में कई नए उप-मंदिर (सब-टेम्पल्स) खोले जाने की तैयारी तेज हो गई है। इन उप-मंदिरों के संचालन और भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ी संख्या में पुजारियों, पुरोहितों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती का फैसला लिया है। यह कदम राम मंदिर को और अधिक व्यवस्थित, आध्यात्मिक और भक्त-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
नए उप-मंदिर किन देवी-देवताओं के होंगे?
ट्रस्ट के अनुसार, राम मंदिर परिसर में निम्नलिखित उप-मंदिर जल्द खोले जाएंगे:
- हनुमान जी का मंदिर – मुख्य मंदिर के पास, जहां हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना होगी।
- सीता-लक्ष्मण-शत्रुघ्न मंदिर – राम जी के परिवार को समर्पित।
- दशरथ महाराज मंदिर – राजा दशरथ की पूजा के लिए।
- कौशल्या माता मंदिर – राम जी की माता को समर्पित।
- सुग्रीव, नल-नील और अंगद मंदिर – रामायण के प्रमुख पात्रों के लिए छोटे-छोटे मंदिर।
- विभीषण मंदिर – रावण के भाई विभीषण को समर्पित।
ये उप-मंदिर मुख्य मंदिर के चारों ओर बनाए जा रहे हैं, ताकि भक्त एक ही परिसर में पूरी रामायण की कथा का आध्यात्मिक अनुभव ले सकें।
पुजारियों की भर्ती: कितने पद और योग्यता?
ट्रस्ट ने कुल 150 से 200 पुजारियों और सहायक पुरोहितों की भर्ती का ऐलान किया है। इनमें शामिल हैं:
- मुख्य पुजारी (वरिष्ठ वैष्णव ब्राह्मण) – 20-25 पद
- सहायक पुजारी और आरती करने वाले – 80-100 पद
- वेदपाठी और भजन-कीर्तन दल – 30-40 पद
- महिला पुरोहित (महिलाओं के लिए विशेष पूजा) – 20 पद
योग्यता:
- वैदिक परंपरा में निपुण ब्राह्मण
- रामायण, वेद, पुराणों का अच्छा ज्ञान
- संस्कृत और हिंदी में प्रवीणता
- उम्र 25 से 50 वर्ष (कुछ पदों पर छूट संभव)
- चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य
भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, मौखिक साक्षात्कार और वैदिक परीक्षण शामिल होगा। आवेदन जल्द ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर शुरू होंगे।
भक्तों की बढ़ती संख्या: क्यों जरूरी है विस्तार?
2024 में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अब तक 25 करोड़ से अधिक भक्त दर्शन कर चुके हैं। 2026 में यह संख्या 40 करोड़ पार करने की उम्मीद है। नए उप-मंदिरों से भक्तों को एक ही स्थान पर रामायण के सभी प्रमुख पात्रों के दर्शन होंगे, जिससे भीड़ का प्रबंधन आसान होगा और आध्यात्मिक अनुभव गहरा होगा।
ट्रस्ट का संदेश और भविष्य की योजना
ट्रस्ट के महासचिव ने कहा कि “राम मंदिर सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि पूरी रामायण का जीवंत केंद्र बनेगा। नए उप-मंदिर और योग्य पुजारी भक्तों को और अधिक दिव्य अनुभव देंगे।” ट्रस्ट ने 2027 तक परिसर में संग्रहालय, राम कथा प्रदर्शनी और भक्त निवास का विस्तार भी प्लान किया है।
अयोध्या राम मंदिर अब सिर्फ धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी बन चुका है। नए उप-मंदिरों और पुजारियों की भर्ती से यह यात्रा और भी यादगार बनेगी।


