प्रयागराज में फिर दोहराया गया दर्दनाक हादसा
प्रयागराज जिले के पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र के सल्लाहपुर इलाके के कुसुआ गांव में बुधवार (14 जनवरी 2026) को एक तालाब में डूबने से चार मासूम बच्चों और एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना दोपहर के समय हुई, जब बच्चे खेलते-खेलते तालाब में उतर गए और युवक ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हादसे के बाद पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और ग्रामीणों में गुस्सा भी है कि तालाब के आसपास कोई सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं है।
घटना का पूरा विवरण
पुलिस के अनुसार, कुसुआ गांव के पास एक पुराना और गहरा तालाब है, जहां बच्चे अक्सर खेलने आते हैं। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे गांव के चार बच्चे (उम्र 8 से 12 वर्ष) तालाब के किनारे खेल रहे थे। अचानक एक बच्चा फिसलकर पानी में गिर गया। बाकी तीन बच्चों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वे भी पानी में चले गए।
इसी बीच गांव का ही रहने वाला 22 वर्षीय युवक (नाम गोपनीय) ने बच्चों की चीखें सुनकर तुरंत तालाब में छलांग लगा दी। युवक ने दो बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन खुद पानी में डूब गया। बाकी दो बच्चे और युवक पानी में ही रह गए। ग्रामीणों ने सूचना मिलते ही तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और रस्सी-लकड़ी की मदद से सभी को बाहर निकाला, लेकिन तब तक पांचों की मौत हो चुकी थी।
परिजनों का दर्द और गांव में कोहराम
मृतक बच्चों के माता-पिता और युवक के परिवार का रोना-धोना देखकर कोई भी टिक नहीं पा रहा। एक मां ने कहा, “मेरा बेटा सिर्फ खेलने गया था… अब कौन मेरी गोद भरगा?” युवक के पिता ने बताया कि उनका बेटा गांव का सहारा था, जो रोज मजदूरी करके परिवार चलाता था। अब परिवार में मातम छाया हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। पिछले कुछ सालों में इसी तालाब में कई बच्चे डूब चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी गंभीरता से सुरक्षा उपाय नहीं किए।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
पुरामुफ्ती थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
एसपी प्रयागराज ने जांच के आदेश दिए हैं और कहा है
कि तालाब के आसपास सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन ने परिवारों को 4 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
तालाबों में सुरक्षा की कमी: एक बड़ी समस्या
प्रयागराज जिले में ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों तालाब और पोखर हैं, लेकिन ज्यादातर के
किनारे पर कोई रेलिंग, चेतावनी बोर्ड या बचाव उपकरण नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि
बच्चों को तैराकी सिखाने और तालाबों के आसपास बाड़ लगाने से ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती है
प्रयागराज के कुसुआ गांव में हुए इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि
ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी कमजोर है। चार मासूम बच्चों और
एक बहादुर युवक की मौत न केवल परिवारों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए दुखद है।
प्रशासन से अपील है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए
तालाबों के आसपास तत्काल रेलिंग, चेतावनी बोर्ड और बचाव उपकरण लगाए जाएं।
बच्चों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी – अब जागने का समय है!

