मजार पर चला बुलडोजर: तीन जेसीबी मशीनें लगीं, अफसर बोले – कमेटी की सहमति से हुई कार्रवाई

देवरिया में अब्दुल गनी शाह बाबा देवरिया में अब्दुल गनी शाह बाबा

लंबे विवाद के बाद कोर्ट का फैसला

यह मामला करीब 6 साल पुराना है। देवरिया शहर के गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के पास स्थित यह मजार सरकारी बंजर भूमि (राजस्व रिकॉर्ड में बंजर घोषित) पर अवैध अतिक्रमण करके बनी बताई गई। उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सरकारी भूमि पर कोई धार्मिक निर्माण नहीं हो सकता।

शुक्रवार को एसडीएम सदर श्रुति शर्मा की अदालत में अंतिम सुनवाई हुई। नियत प्राधिकारी ने फैसला सुरक्षित रख लिया और मजार पक्ष को शनिवार शाम तक नक्शा स्वीकृति के दस्तावेज प्रस्तुत करने का समय दिया। लेकिन मजार कमेटी कोई संतोषजनक दस्तावेज नहीं दे सकी। अदालत ने निर्देश दिया कि कमेटी खुद अवैध निर्माण हटाए, जिस पर कमेटी ने सहमति जताई।

तीन जेसीबी से चली कार्रवाई

रविवार दोपहर करीब 12 बजे प्रशासन ने एक्शन शुरू किया। तीन जेसीबी मशीनें मौके पर पहुंचीं और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चालू हुई। भारी पुलिस बल (करीब 250-300 जवान) तैनात रहा ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने। मजार परिसर को पहले खाली कराया गया, फिर सुरक्षा घेरा बनाकर बुलडोजर चले। कार्रवाई लगभग 6 घंटे तक चली। अफसरों ने कहा कि कमेटी की सहमति होने से कार्रवाई सुचारू रूप से हुई और कोई विरोध नहीं हुआ।

प्रशासन का कहना है कि यह धार्मिक विरोध नहीं, बल्कि कानून का पालन है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी था, क्योंकि यह ओवरब्रिज और यातायात को प्रभावित कर रहा था।

विधायक की शिकायत से शुरू हुआ मामला

देवरिया सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी (बीजेपी) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखित शिकायत की थी। इसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। विधायक ने कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्रवाई के बाद उन्होंने इसे सराहनीय बताया।

सियासी प्रतिक्रिया और स्थानीय भावनाएं

कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने इसे सांप्रदायिक करार दिया। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि योगी सरकार मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है।

लेकिन प्रशासन और बीजेपी ने इसे स्पष्ट किया कि नियम सबके लिए बराबर हैं – चाहे मंदिर हो या मजार।

स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं।

कुछ का कहना है कि यह जगह लंबे समय से पूजा के लिए इस्तेमाल होती थी,

जबकि अन्य इसे अवैध अतिक्रमण मानते हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं,

जहां लोग कार्रवाई की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं।

आगे क्या?

प्रशासन ने मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है

और भूमि को पूरी तरह खाली कराने की प्रक्रिया जारी है।

इस तरह के अन्य अतिक्रमणों पर भी नजर रखी जा रही है। देवरिया प्रशासन ने अपील की है

कि कोई भी धार्मिक स्थल वैध अनुमति के बिना न बनाए,

ताकि ऐसी कार्रवाई न करनी पड़े।

यह घटना उत्तर प्रदेश में अतिक्रमण हटाओ अभियान का हिस्सा है

, जो कानून के शासन को मजबूत करने का संदेश दे रही है।

लेकिन धार्मिक संवेदनशीलता के कारण यह हमेशा विवादास्पद रहता है।

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