मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने पर भड़की हिंसा, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम आया सामने – पथराव, लाठीचार्ज की पूरी कहानी

मस्जिद के पास अतिक्रमण मस्जिद के पास अतिक्रमण

दिल्ली के पुरानी दिल्ली स्थित तुर्कमान गेट इलाके में 7 जनवरी 2026 को उस समय बवाल मच गया जब एमसीडी ने कोर्ट के आदेश पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर एक्शन शुरू किया। देर रात शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस घटना में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम भी सामने आया है, जिन पर भीड़ को उकसाने का आरोप लग रहा है।

कैसे शुरू हुई कार्रवाई और भड़का उपद्रव?

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर एमसीडी और पुलिस की संयुक्त टीम ने 6-7 जनवरी की रात को अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध निर्माण और कब्जे को हटाने के लिए बुलडोजर लेकर टीम पहुंची। रात करीब 2-3 बजे कार्रवाई शुरू हुई। स्थानीय लोगों का कहना था कि यह कार्रवाई अचानक की गई, जबकि पुलिस का दावा है कि यह कोर्ट ऑर्डर पर थी।

जैसे ही बुलडोजर ने काम शुरू किया, कुछ लोग इकट्ठा हो गए और विरोध करने लगे। देखते-देखते भीड़ बढ़ी और पथराव शुरू हो गया। उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थर, कांच की बोतलें तक फेंकी। इस हमले में करीब 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ वीडियो में धार्मिक नारे लगाते हुए पथराव करने की क्लिप्स भी सामने आई हैं।

पुलिस ने बैरिकेडिंग तोड़ी जाने और लाउड हेलर छीने जाने की भी शिकायत की। सुबह तक स्थिति नियंत्रण में आई, लेकिन इलाके में तनाव बना रहा। अगले दिन अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम क्यों आया सामने?

घटना की सबसे बड़ी चर्चा समाजवादी पार्टी के रामपुर से सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को लेकर है। सूत्रों के अनुसार, देर रात उपद्रव के समय नदवी घटनास्थल पर मौजूद थे। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने भीड़ को उकसाया या मौजूदगी से माहौल गरमाया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि वे मध्यस्थता करने पहुंचे थे, लेकिन वीडियो और गवाहों के आधार पर उनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने नदवी को नोटिस भेजने या पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी की है। जॉइंट सीपी ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए भीड़ को इकट्ठा करने की कोशिश हुई। भाजपा ने इस पर अखिलेश यादव से जवाब मांगा है, जबकि सपा ने इसे राजनीतिक साजिश बताया। सपा नेता एसटी हसन ने कार्रवाई की निंदा की और कहा कि एक्शन का रिएक्शन तो होगा।

नदवी ने सफाई दी कि वे शांति बनाए रखने गए थे, लेकिन आरोप गंभीर हैं।

पुलिस SIT गठित कर जांच कर रही है।

पुलिस की कार्रवाई और अब तक की गिरफ्तारियां

हिंसा के बाद पुलिस ने त्वरित एक्शन लिया। 450 से ज्यादा वीडियो, CCTV फुटेज और बॉडीकैम की जांच से

30 उपद्रवियों की पहचान की गई। कुछ को गिरफ्तार किया गया, जबकि यूट्यूबर सलमान की भी तलाश है।

बलवा, पथराव और सरकारी काम में बाधा की धाराएं लगाई गई हैं।

दिल्ली के गृह मंत्री ने कहा कि हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है,

जिसमें साजिश का कोण भी शामिल है।

ऐतिहासिक संदर्भ: 1976 की यादें

तुर्कमान गेट का नाम सुनते ही 1976 की इमरजेंसी की याद आती है,

जब बड़े पैमाने पर बुलडोजर एक्शन हुआ था

और हिंसा भड़की थी। इस बार की घटना ने उन यादों को ताजा कर दिया, हालांकि स्केल बहुत छोटा है।

निष्कर्ष में कहें तो यह घटना अवैध अतिक्रमण हटाने की कानूनी कार्रवाई से शुरू होकर

राजनीतिक विवाद में बदल गई। सपा सांसद की भूमिका पर जांच से कई खुलासे हो सकते हैं।

दिल्ली पुलिस की सतर्कता से स्थिति नियंत्रण में है,

लेकिन इलाके में शांति बनाए रखना चुनौती है। ऐसे मामलों में कानून का पालन और संवाद दोनों जरूरी हैं।

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