प्रयागराज का माघ मेला 2026 आस्था का महासंगम बन चुका है। त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान कर रहे हैं, जबकि साधु-संत कल्पवास और प्रवचन में लीन हैं। लेकिन इस दिव्य वातावरण के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है – संसार का मोह त्याग चुके संन्यासी अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और व्यक्तिगत गनर की मांग कर रहे हैं।
साधु-संतों की सुरक्षा मांग: जान का खतरा बताकर लिखे पत्र
माघ मेला क्षेत्र में प्रवास कर रहे करीब 150 साधु-संतों ने मेला पुलिस से व्यक्तिगत सुरक्षा की गुहार लगाई है। इन संतों ने एसपी मेला को पत्र लिखकर जान का खतरा बताते हुए गनर उपलब्ध कराने की मांग की है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ये संत विभिन्न अखाड़ों और शिविरों से जुड़े हैं, जो मेले में धार्मिक प्रवचन और सत्संग आयोजित कर रहे हैं।
संन्यासी जीवन में मोह-माया छोड़ने वाले ये बाबा अब क्यों असुरक्षा की भावना से ग्रस्त हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि मेले में बढ़ती भीड़, पुराने विवाद और कुछ असामाजिक तत्वों की मौजूदगी इसके पीछे कारण हो सकते हैं। पिछले कुंभ मेलों में भी कुछ संतों के बीच संपत्ति या अखाड़ा विवाद सामने आए थे, जो सुरक्षा की मांग को बढ़ावा दे रहे हैं।
LIU जांच के बाद 90 संतों को मिली सुरक्षा
मेला प्रशासन ने इन आवेदनों को गंभीरता से लिया है। स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो गोपनीय तरीके से खतरे का सत्यापन कर रही है। LIU की रिपोर्ट के आधार पर अब तक करीब 90 साधु-संतों को व्यक्तिगत गनर प्रदान किए जा चुके हैं। शेष आवेदनों पर जांच चल रही है और जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
इसके अलावा, मेले में 65 से अधिक शिविरों की सामान्य सुरक्षा के लिए होमगार्ड तैनात किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि वास्तविक खतरे वाले संतों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि मेले की दिव्यता बनी रहे।
माघ मेला 2026 की अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
माघ मेला 2026 को अभूतपूर्व सुरक्षा कवच दिया गया है। मेले में 400 से अधिक एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि पूरे प्रयागराज शहर में 1552 कैमरे निगरानी कर रहे हैं। सेंट्रल कंट्रोल रूम से 24 घंटे मॉनिटरिंग हो रही है।
इसके अलावा:
- 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
- एटीएस कमांडो और ड्रोन सर्विलांस
- 20 वॉच टावर, 17 अस्थायी थाने और 42 चौकियां
- 16 महिला हेल्प डेस्क और 17 साइबर हेल्प डेस्क
- 761 फायरकर्मी और एनडीआरएफ टीमें
प्रशासन का दावा है कि यह सुरक्षा व्यवस्था महाकुंभ स्तर की है, ताकि करोड़ों श्रद्धालु बिना किसी भय के आस्था की डुबकी लगा सकें।
माघ मेला का आध्यात्मिक महत्व क्यों खास?
माघ मेला हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख पर्व है।
संगम स्नान से पापों का नाश और आत्मा की शुद्धि होती है।
इस वर्ष मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा।
प्रमुख स्नान पर्व जैसे मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
साधु-संतों की मौजूदगी मेले की रौनाक बढ़ाती है। उनके प्रवचन और सत्संग से श्रद्धालु आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते हैं।
लेकिन सुरक्षा मांग की यह घटना मेले के आयोजन में नई चुनौती पेश कर रही है।
आस्था और सुरक्षा का संतुलन
माघ मेला 2026 प्रयागराज में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है,
लेकिन साधु-संतों की सुरक्षा मांग ने प्रशासन की सतर्कता बढ़ा दी है।
LIU की जांच से वास्तविक खतरे वाले संतों को सुरक्षा मिल रही है,
जबकि सामान्य व्यवस्था भी मजबूत है।
उम्मीद है कि यह मेला शांतिपूर्ण और दिव्य रहेगा

