गोरखपुर: पत्रकारिता से समाज को सर्वाधिक अपेक्षा भाषाई व्यवहार की होती है. किन्वितु भिन्न मीडिया की भाषा मर्यादा के विपरीत होना उसकी विश्वसनीयता को संदिग्ध बना रही है.
इस तरह के विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राजेश मल्ल ने व्यक्त किया है.
गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन और प्रेस क्लब गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वृहद अलंकरण समारोह और गोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन में बताया कि पत्रकार को आत्म निरीक्षण भी करना होगा,
जो विश्वास पत्रकारिता खो रही है, उसे पुनर्स्थापित करना होगा. तकनीक हमेशा लाभप्रद होती है बशर्ते उसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए.
समारोह में वरीष्ठ पत्रकार शलभ मणि त्रिपाठी को स्वर्गीय रत्नेश मिश्रा स्मृति सम्मान, अभिलाष भट्ट को स्वर्गीय दिनेश राय स्मृति सम्मान, वागीश धर द्विवेदी को स्वर्गीय रोहित पांडे स्मृति सम्मान और धीरज श्रीवास्तव को स्वर्गीय राजीव केतन स्मृति सम्मान से अलंकृत किया गया.
इनके साथ ही राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी को वीरांगना झलकारी देवी, नारी शक्ति सम्मान तथा नगर पालिका परिषद देवरिया की तीसरी बार चुनी गई अध्यक्ष अलका सिंह को रानी लक्ष्मीबाई नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित किया गया.
छात्र शक्ति के प्रतीक और समाज सेवा के प्रति समर्पित स्वर्गीय डॉक्टर अशोक श्रीवास्तव को मृत्युपर्यंत स्वर्गीय बालकृष्ण बजाज स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से अलंकृत किया गया.
सम्मान समारोह कके दौरान सभी स्मृति शेष पत्रकारों के परिजन भी मंच पर उपस्थित थे. गोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए आकाशवाणी न्यूज़ के पूर्व समाचार संपादक श्री रमेश चंद्र शुक्ला ने कहा कि
“आज सभी को सभी से अपेक्षाएं होती हैं जिसकी अपेक्षा पूर्ण नहीं होती है, वह असंतुष्ट रहता है. पत्रकार सबको एक साथ संतुष्ट नहीं कर सकता है, इसलिए वह आरोपों के घेरे में रहता है.”
पत्रकारिता आज नोट में पड़ी चांदी के धागे के समान है. अपेक्षा है कि यह चांदी की लाइन गायब न हो जाए आज उसे सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी से तेज आगे बढ़ने की अपेक्षा की जा रही है.
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्वोत्तर रेलवे के पूर्व सी ओ एम राकेश त्रिपाठी ने कहा कि मीडिया की भूमिका लोगों को जागृत करने और शिक्षित करने की है. वे लोकतंत्र के प्रहरी है और यही समाज की अपेक्षा होती है.
ग्रामीण विधायक विपिन सिंह ने कहा कि पत्रकार समाज को दिशा देते हैं और सरकार को भी उसकी कमी से अवगत कराते हैं.
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज सिंह ने कहा तकनीकी परिवर्तन पत्रकारिता के समक्ष बहुत बड़ी चुनौती है. समाज की अपेक्षा पत्रकारिता और तकनीक में सामंजस्य के साथ समाचार बनाने की होती है.
तकनीकी के उपयोग में पत्रकारों को रिसर्च का पूरा अवसर नहीं मिल पाता है और बिना विषय समझे पत्रकारिता हो ही नहीं सकती है.
पूर्व महापौर अंजू चौधरी ने बताया कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में सनसनीखेज न्यूज़ बनाना पत्रकारिता के समक्ष एक बड़ा संकट है. कभी भी अर्ध सत्य को न परोसे, वरना पत्रकारिता पर भरोसा करने वाली जनता भ्रमित हो जायेगी.
इस अवसर पर अतुल सर्राफ, वरिष्ठ अधिवक्ता केबी दुबे, लोक गायक हरिप्रकाश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार सर्वेश दुबे, सुधा मोदी दूरदर्शन प्रभारी अतुल शुक्ला,
भानु मिश्रा अरविंद राय भूपेंद्र ओमकार द्विवेदी रीतेश सहित सैकड़ो की संख्या में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे.

