पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल का मोहन भागवत को खुला पत्र: “हिंदू राष्ट्र का जहर उगलना तुरंत बंद करें!”
मोहन भागवत: शांतिवन शोध पुस्तकालय, 23 दिसंबर 2025 जाने-माने शिक्षाविद, पर्यावरण हितैषी और जन सरोकारों के प्रखर योद्धा पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक लंबा और भावुक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने हिंदू राष्ट्र की मांग को “अलगाववादी और जहरीला” बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है।
“मुझे प्यारा भारत, तिरंगा और संविधान चाहिए – हिंदू राष्ट्र नहीं”
डॉ. मल्ल ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “मुझे प्यारा भारत, तिरंगा, संविधान चाहिए। हिंदू राष्ट्र भगवाध्वज बिल्कुल नहीं। मैं हिंदू राष्ट्र की मांग का पतन चाहता हूं।” उन्होंने घोषणा की कि यदि हिंदू राष्ट्र की मांग वापस नहीं ली गई तो वे 14 अप्रैल 2026 (अंबेडकर जयंती) को आरएसएस मुख्यालय, नागपुर के सामने अमरण अनशन शुरू कर देंगे। अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक “हिंदू राष्ट्र” का शब्द त्याग नहीं किया जाता, या वे अपने जीवन का बलिदान दे देंगे।
“क्या आप मुस्लिम राष्ट्र, सिख राष्ट्र, बौद्ध राष्ट्र स्वीकार करेंगे?”
पूर्वांचल गांधी ने सवाल उठाया: “सर संघसंचालक, क्या आप इस देश का नाम मुस्लिम राष्ट्र, सिख राष्ट्र या बौद्ध राष्ट्र स्वीकार कर लेंगे? नहीं न! फिर संविधान इसे ‘भारत’ कहता है, तो हिंदू राष्ट्र कौन स्वीकार करेगा?” उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक संविधान है, सर्वोच्च न्यायालय है और 145 करोड़ लोग हैं, तब तक यह देश भारत, हिंदुस्तान, हिंद है – हिंदू राष्ट्र नहीं।
“हिंदू राष्ट्र की मांग मुस्लिम लीग की पाकिस्तान मांग की देर से प्रतिक्रिया है”
डॉ. मल्ल ने लिखा: “आपने हिंदू राष्ट्र की मांग 1908 में मुस्लिम लीग की पाकिस्तान मांग के बाद शुरू की थी। उस समय भारत गुलाम था। 1947 में आजादी मिली, 1950 में संविधान बना। अब हिंदू राष्ट्र का औचित्य पूरी तरह समाप्त हो चुका है।”
“गांधी, भगत सिंह, बोस, आजाद की शपथ पर कहता हूं – हिंदू राष्ट्र का अंत हो”
उन्होंने सत्य और अहिंसा की शक्ति से कहा: “गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, बिस्मिल, अशफाकउल्ला, चंद्रशेखर आजाद की शपथ लेकर कहता हूं – अलगाववादी शब्द ‘हिंदू राष्ट्र’ का अंत हो। यह शब्द सुनते-सुनते मेरा कान फट रहा है, भारत रूपी मेरा कलेजा दुख रहा है।”
“बांग्लादेश-पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार, लेकिन भारत में हिंदू कट्टरपंथी मुसलमानों पर अत्याचार”
पत्र में बांग्लादेश का जिक्र करते हुए लिखा: “बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार विभाजन के समय से चल रहा है। लेकिन आज भारत में हिंदू कट्टरपंथी मुसलमानों पर अत्याचार कर रहे हैं। दोनों तरफ कट्टरपंथी ताकतें एक-दूसरे को बढ़ावा दे रही हैं।”
“बंगाल चुनाव से पहले हिंदू एकता की चिंता? शिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी पर क्यों चुप?”
पूर्वांचल गांधी ने तीखा सवाल किया: “बंगाल में चुनाव आते ही हिंदू एकता और हालात बदलने की चिंता? क्या शिक्षा, चिकित्सा, बेरोजगारी, गरीबी मिटा देंगे? आजादी के 78 साल बाद बंगाल की चिंता? देश की एकता की चिंता क्यों नहीं?”
“हिंदू-मुस्लिम एकता ही भारत का राष्ट्रीय स्वरूप है”
उन्होंने लिखा: “हिंदू-मुस्लिम एकता हमारा राष्ट्रीय स्वरूप है। इसी से भारत एक है और दुनिया के शक्तिशाली देशों में शामिल है। हम ब्रिगेडियर उस्मान, एपीजे अब्दुल कलाम को कभी नहीं छोड़ सकते। जब आप हिंदू एकता कहते हैं, मुसलमान मुस्लिम एकता, सिख सिख एकता कहते हैं, तो तीनों मिलकर राष्ट्रीय एकता को कमजोर करते हैं।”
“‘हिंदू’ कोई धर्म नहीं, भूगोल से निकला शब्द है”
डॉ. मल्ल ने इतिहास का हवाला दिया: “‘हिंदू’ यूनानी शब्द ‘इंडस’ से निकला है – सिंधु नदी से। ऋग्वेद, रामायण, महाभारत में देश का नाम भारत है। संविधान में भी भारत। 700 साल मुस्लिम शासन में मुस्लिम राष्ट्र नहीं बना, 190 साल अंग्रेजी शासन में इसाई राष्ट्र नहीं बना। 11 साल की सत्ता में आप इसे हिंदू राष्ट्र क्यों बना रहे हैं?”
“आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर भारत गणतंत्र स्वीकार करें”
अंत में उन्होंने निवेदन किया: “आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर ‘भारत गणतंत्र’ स्वीकार कर लें।
अन्यथा 14 अप्रैल को अमरण अनशन शुरू कर दूंगा।” पत्र की प्रतियां मुख्य न्यायाधीश,
प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, उत्तर प्रदेश गवर्नर, मुख्यमंत्री आदि को भी भेजी गई हैं।
पत्र का समापन: जय हिंद, जय भारत, जय गांधी, जय अंबेडकर, जय एपीजे अब्दुल कलाम!
डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने पत्र को इन शब्दों के साथ खत्म किया:
*जय हिंद! जय भारत! जय भगत सिंह!
*जय गांधी! जय अंबेडकर!
जय एपीजे अब्दुल कलाम!
यह पत्र देश की एकता, संविधान और बहुलवाद की रक्षा के लिए एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है।


