गोरखपुर में यूरिया संकट गहराया: समितियों पर लंबी कतारें, किसान परेशान

जंगल कौड़िया में स्थिति सबसे गंभीर जंगल कौड़िया में स्थिति सबसे गंभीर

गोरखपुर में यूरिया संकट गहराया: पूर्वांचल के प्रमुख कृषि क्षेत्र गोरखपुर में रबी फसल की बुवाई के समय यूरिया की भारी किल्लत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासकर जंगल कौड़िया ब्लॉक और आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक सहकारी समितियों (कोऑपरेटिव सोसाइटी) पर सुबह से शाम तक लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। किसान घंटों इंतजार करने के बाद भी पूरी मात्रा में यूरिया नहीं पा पा रहे, जिससे गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है।

देशभर में यूरिया की मांग इस साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, क्योंकि अच्छी मानसून के कारण खरीफ के बाद रबी में भी फसलें बढ़ी हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर वितरण में देरी, कथित कालाबाजारी और होर्डिंग की शिकायतें तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश में कई जिलों की तरह गोरखपुर में भी यूरिया की कमी की खबरें आ रही हैं, जहां किसान टोकन लेकर भी पूरा बैग नहीं ले पा रहे।

जंगल कौड़िया में स्थिति सबसे गंभीर

जंगल कौड़िया ब्लॉक के कई गांवों जैसे चिउटहा, उत्तरासोत, बेलघाट आदि में किसानों का कहना है कि समिति पर रोजाना सैकड़ों किसान पहुंचते हैं, लेकिन यूरिया की सप्लाई बहुत कम आ रही है। एक किसान ने बताया, “सुबह 5 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन शाम तक 1-2 बैग ही मिल पाते हैं। फसल की बुवाई रुक गई है, अगर ऐसा ही रहा तो नुकसान बड़ा होगा।”

यहां देखिए गोरखपुर और यूपी के ग्रामीण इलाकों में यूरिया संकट की कुछ मार्मिक तस्वीरें, जहां किसान लंबी कतारों में इंतजार कर रहे हैं:

संकट के प्रमुख कारण

  • रबी सीजन में यूरिया की मांग बढ़कर 40 मिलियन टन के पार पहुंचने की आशंका
  • घरेलू उत्पादन में कमी (2025 में अप्रैल-सितंबर में 5.6% गिरावट)
  • आयात में देरी और वैश्विक कीमतों में उछाल
  • डीलरों द्वारा होर्डिंग और कालाबाजारी की शिकायतें
  • वितरण व्यवस्था में ग्रामीण स्तर पर कमियां

केंद्र सरकार ने पिछले दिनों यूरिया की उपलब्धता को लेकर आश्वासन दिया है और राज्यों को अतिरिक्त आवंटन किया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने भी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर सेल सेंटर पर कम से कम 25 टन यूरिया उपलब्ध रहे।

लेकिन किसानों का कहना है कि जमीनी हकीकत अलग है।

किसान संगठन इस संकट को तुरंत दूर करने की मांग कर रहे हैं,

वरना फसल उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है।

गोरखपुर जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है।

क्या आपके इलाके में भी यूरिया की समस्या है? कमेंट में अपनी स्थिति बताएं और इस पोस्ट को शेयर करें ताकि जागरूकता बढ़े! 🌾🚜

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