असम में एक बार फिर ट्रेन और वन्यजीवों के बीच टकराव की दर्दनाक घटना हुई है। दिल्ली से गुवाहाटी जा रही राजधानी एक्सप्रेस हाथियों के झुंड से टकरा गई, जिसमें कई हाथी मारे गए। टक्कर की वजह से ट्रेन के 5 डिब्बे पटरी से उतर गए। यह हादसा गुवाहाटी के पास वन क्षेत्र में हुआ। सौभाग्य से सभी यात्री सुरक्षित हैं, लेकिन ट्रेन सेवा कई घंटों तक बाधित रही। हाथी वन्यजीव कॉरिडोर में थे और ट्रेन की तेज स्पीड से बचाव नहीं हो सका। यह घटना असम में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है।
वन विभाग और रेलवे ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है। पर्यावरणविद और स्थानीय लोग हाथी संरक्षण पर सवाल उठा रहे हैं। असम में ऐसे हादसे पहले भी हो चुके हैं, जहां ट्रेनों से हाथी मारे गए। यह हादसा रेल ट्रैक पर सुरक्षा उपायों की कमी दिखाता है। यात्री ट्रेन में थे, लेकिन कोई मानवीय हानि नहीं हुई।
हादसे का विवरण: टक्कर से डिब्बे उतरे
हादसा रात में जंगल क्षेत्र में हुआ। मुख्य जानकारी:
- ट्रेन: दिल्ली-गुवाहाटी राजधानी एक्सप्रेस।
- हाथियों का झुंड ट्रैक पार कर रहा था।
- टक्कर से 4-5 हाथी मरे।
- इंजन और 5 डिब्बे पटरी से उतरे।
- ट्रेन रुकी, यात्री सुरक्षित निकाले।
- राहत टीम मौके पर पहुंची।
हाथियों की मौत से वन्यजीव प्रेमी दुखी हैं।
मुख्य कारण: तेज स्पीड और कॉरिडोर
हादसे के पीछे मुख्य वजहें:
- ट्रेन की तेज रफ्तार।
- वन्यजीव कॉरिडोर में सिग्नल की कमी।
- रात का समय, दृश्यता कम।
- हाथी माइग्रेशन का समय।
- सुरक्षा उपाय अपर्याप्त।
रेलवे ने कहा कि स्पीड कम करने के निर्देश हैं, लेकिन पालन में कमी।
प्रभाव: ट्रेन सेवा बाधित, वन्यजीव नुकसान
हादसे से:
- कई ट्रेनें प्रभावित।
- रूट पर देरी।
- हाथी परिवार बिखरा।
- वन्यजीव संरक्षण पर सवाल।
- पर्यावरण प्रभाव।
असम में ऐसे हादसे आम हो गए हैं।
जांच और कार्रवाई: संयुक्त टीम
रेलवे और वन विभाग ने:
- जांच शुरू।
- चालक और स्टाफ से पूछताछ।
- ट्रैक पर सेंसर लगाने की योजना।
- हाथी कॉरिडोर पर विशेष उपाय।
- मुआवजा और संरक्षण।
जांच से कारण साफ होंगे।
वन्यजीव संरक्षण: जरूरी उपाय
ऐसे हादसों से बचाव:
- स्पीड लिमिट सख्त।
- अलर्ट सिस्टम और सेंसर।
- अंडरपास या ओवरब्रिज।
- जागरूकता और गश्त।
- कॉरिडोर मैपिंग।
- स्थानीय सहयोग।
यह उपाय जान और संपत्ति बचाएंगे।

