गोरखपुर में इनकम टैक्स विभाग की बड़ी कार्रवाई जारी है। पिछले 3 दिनों से 5 प्रमुख कारोबारियों के ठिकानों पर रेड चल रही है। 18 दिसंबर 2025 तक छापेमारी में कई अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं। विभाग टैक्स चोरी, अवैध लेन-देन और आय से अधिक संपत्ति की जांच कर रहा है। रेड शहर के प्रमुख व्यापारिक इलाकों और गोदामों पर हो रही है। पुलिस सुरक्षा में टीमें काम कर रही हैं। व्यापारी वर्ग में हड़कंप मच गया है और बाजार में चर्चा का विषय बन गया है। यह कार्रवाई यूपी में टैक्स अनुपालन को सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। जांच में डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक डिटेल्स भी चेक किए जा रहे हैं। इस ब्लॉग में हम गोरखपुर IT रेड की पूरी डिटेल्स, ठिकाने, हाथ लगे दस्तावेज, कारण और व्यापारियों पर प्रभाव बताएंगे। यदि आप गोरखपुर में व्यापार करते हैं, तो ये अपडेट्स आपके लिए जरूरी हैं।
रेड की शुरुआत: 3 दिन से जारी कार्रवाई
रेड 15 दिसंबर से शुरू हुई और 18 दिसंबर तक जारी है। मुख्य जानकारी:
- 5 कारोबारियों के ठिकाने टारगेट।
- शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र।
- गोदाम, ऑफिस और आवास।
- लखनऊ और दिल्ली से आई टीमें।
- 50+ अधिकारी शामिल।
- पुलिस सुरक्षा में रेड।
यह रेड लंबी चलने वाली है और शाम तक पूरी होने की उम्मीद है।
हाथ लगे अहम दस्तावेज: जांच में बड़े खुलासे
रेड में कई महत्वपूर्ण चीजें मिलीं:
- बैंक स्टेटमेंट और लेन-देन रिकॉर्ड।
- डिजिटल डिवाइस – लैपटॉप, मोबाइल।
- कैश और ज्वेलरी।
- संपत्ति के कागजात।
- हवाला और अवैध लेन-देन के सबूत।
विभाग ने कहा कि दस्तावेजों से टैक्स चोरी के बड़े मामले सामने आ सकते हैं।
कारण: टैक्स चोरी और अवैध संपत्ति
रेड की मुख्य वजहें:
- आय से अधिक संपत्ति।
- कैश लेन-देन और हवाला।
- व्यापार में टैक्स चोरी।
- पुरानी शिकायतें और इनपुट।
- व्यापारियों की आय और खर्च में अंतर।
यह कार्रवाई लंबी जांच का नतीजा है।
व्यापारियों में हड़कंप: कारोबार प्रभावित
रेड से व्यापारी वर्ग में हड़कंप है। मुख्य प्रभाव:
- ठिकाने सील।
- कारोबार ठप।
- परिवार परेशान।
- अन्य व्यापारियों में डर।
- बाजार में चर्चा।
व्यापारी संघ ने कहा, “जांच पारदर्शी हो।”
पुलिस सुरक्षा: रेड में सहयोग
पुलिस ने रेड में पूर्ण सहयोग दिया। मुख्य कदम:
- सुरक्षा घेरा।
- ट्रैफिक कंट्रोल।
- कोई बाधा नहीं।
यह सहयोग जांच को सुचारू बनाता है।
अपेक्षित कार्रवाई: जांच के बाद एक्शन
जांच पूरी होने पर:
- टैक्स नोटिस।
- पेनल्टी और जुर्माना।
- बड़े मामलों में FIR।
- संपत्ति जब्ती संभावित।

