लखनऊ। उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाला है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी ने 13 दिसंबर को पार्टी मुख्यालय में नामांकन दाखिल कर दिया। उनके प्रस्तावक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और अन्य वरिष्ठ नेता रहे। चूंकि कोई दूसरा उम्मीदवार सामने नहीं आया, इसलिए पंकज चौधरी का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो गया है। रविवार 14 दिसंबर को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल औपचारिक घोषणा करेंगे।
पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर
पंकज चौधरी भाजपा के कद्दावर ओबीसी नेता हैं। कुर्मी समुदाय से आने वाले चौधरी का जन्म 15 नवंबर 1964 को गोरखपुर में हुआ। उनके पिता भगवती प्रसाद चौधरी उद्योगपति थे, जबकि मां उज्ज्वल चौधरी महाराजगंज जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। राजनीति की शुरुआत 1989 में गोरखपुर नगर निगम के पार्षद के रूप में की। 1990 में भाजपा की जिला कार्यसमिति सदस्य बने।
1991 में पहली बार महाराजगंज लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद 1996, 1998, 2004, 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत हासिल की। सिर्फ 1999 और 2009 में हार मिली। मोदी सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2023 में उनके घर गोरखपुर गए थे, जो उनके कद को दर्शाता है। पार्टी कैडर में उनकी मजबूत पकड़ है और पूर्वांचल में बड़ा चेहरा माने जाते हैं।
क्यों चुना गया कुर्मी चेहरा?
2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को यूपी में झटका लगा। समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से ओबीसी वोटों में सेंध लगी। कुर्मी समुदाय, जो परंपरागत रूप से भाजपा का वोट बैंक रहा, का एक हिस्सा सपा की ओर खिसका।
कुर्मी यूपी में 8-10 फीसदी आबादी रखते हैं
और पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड में 40-50 विधानसभा सीटों पर असर डालते हैं।
पंकज चौधरी को अध्यक्ष बनाकर भाजपा नॉन-यादव ओबीसी वोटों को मजबूत करना चाहती है।
यह 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा है।
पार्टी ने ओबीसी चेहरा चुनकर सपा के पीडीए का काउंटर करने का प्लान बनाया है।
अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) से गठबंधन भी कुर्मी फोकस को मजबूत करता है।
नामांकन में दिखा संगठन का जोश
नामांकन के दौरान भाजपा मुख्यालय में भारी भीड़ रही। सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव मौर्य, ब्रजेश पाठक, संगठन
मंत्री धर्मपाल सिंह समेत कई मंत्री और विधायक मौजूद रहे।
यह इवेंट पार्टी की एकजुटता दिखाने का मौका बना

