UNESCO ने दीपावली को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया, भारतीय संस्कृति को मिला ऐतिहासिक सम्मान

UNESCO दीपावली अब UNESCO की विश्व अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल

गोरखपुर, 11 दिसंबर 2025 (गुरुवार)

ऐतिहासिक फैसला: दीपावली अब UNESCO की विश्व अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल

भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के वैश्विक सम्मान में अभूतपूर्व वृद्धि करते हुए UNESCO ने दीपावली पर्व को अपनी “Representative List of Intangible Cultural Heritage of Humanity” में औपचारिक रूप से स्थान प्रदान किया है।

गुरुकृपा संस्थान गोरखपुर ने किया हर्षोल्लास के साथ स्वागत

गुरुकृपा संस्थान एवं सनातन ग्रन्थालय, गोरखपुर इस ऐतिहासिक निर्णय का हर्षपूर्वक स्वागत करता है।

बृजेश राम त्रिपाठी ने कहा – “दीपावली अब सिर्फ भारत का नहीं, पूरी दुनिया का उत्सव है”

गुरुकृपा संस्थान के संस्थापक महासचिव एवं सामाजिक कार्यकर्ता बृजेश राम त्रिपाठी ने UNESCO के इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया में हर्ष उत्कर्ष पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा—

“दीपावली केवल भारत का पर्व नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव है। प्रकाश पर अंधकार की विजय, सत्य पर असत्य की विजय और सद्भाव, सेवा तथा सकारात्मकता का यह संदेश पूरी दुनिया को जोड़ने की शक्ति रखता है। UNESCO द्वारा दीपावली को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता मिलना भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक महिमा, सनातन परंपराओं की गहराई और हमारी सांस्कृतिक एकात्मकता का वैश्विक सम्मान है। गुरुकृपा संस्थान एवं सनातन ग्रन्थालय इस निर्णय को भारत के प्रत्येक नागरिक और सभी सनातन प्रेमियों का गौरव मानता है।”

UNESCO ने दीपावली की इन खासियतों को बताया संरक्षण योग्य

उन्होंने यूनेस्को को धन्यवाद देते हुए कहा कि UNESCO द्वारा मान्यता के आधार दीपावली का बहु-समुदाय, बहु-देशीय और सांस्कृतिक विविधता से भरपूर स्वरूप, बुराई पर अच्छाई की विजय, मानवीय एकता, परिवारिक सद्भाव और सौहार्द का संदेश, दीप प्रज्ज्वलन, लक्ष्मी गणेश पूजा, विसर्जन, रंगोली, पारंपरिक परिधान और सामाजिक कार्यक्रमों जैसी जीवंत सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ संरक्षण योग्य हैं।

सनातन संस्कृति को विश्व स्तर पर मिली नई पहचान और गौरव

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का व्यापक प्रभाव एवं सांस्कृतिक महत्व के इस मान्यता से भारत के आध्यात्मिक मूल्यों,

सनातन संस्कृति और लोक परंपराओं को विश्व पटल पर नई शक्ति, नई प्रतिष्ठा और नई पहचान मिली है।

गुरुकृपा संस्थान एवं सनातन ग्रन्थालय इसे भारत की सांस्कृतिक धरोहर के उत्थान का ऐतिहासिक क्षण मानता है।

भवदीय बृजेश राम त्रिपाठी सामाजिक कार्यकर्ता एवं संस्थापक महासचिव गुरुकृपा संस्थान, गोरखपुर

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