गोरखपुर में श्रम संहिता-बिजली निजीकरण पर टकराव हुआ तेज: फरवरी में आम हड़ताल की तैयारी
गोरखपुर श्रम संहिता, 10 दिसंबर 2025। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में केंद्र सरकार के चार नए श्रम संहिता (Labour Codes) और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ मजदूरों व कर्मचारियों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से जिले में ट्रेड यूनियनों के नेतृत्व में प्रदर्शन, धरना और नारेबाजी का दौर जारी है। अब सभी प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर फरवरी 2026 में पूरे उत्तर प्रदेश में आम हड़ताल करने का ऐलान किया है।
क्या हैं मुख्य मुद्दे?
- चार नए श्रम संहिता (Labour Codes) को मजदूर-विरोधी बताते हुए यूनियनों का कहना है कि इनसे 8 घंटे की कार्यावधि, ओवरटाइम, सामाजिक सुरक्षा और यूनियन बनाने का अधिकार छीना जाएगा।
- बिजली विभाग के निजीकरण से हजारों कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ने और बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
- फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत गोरखपुर सहित पूर्वांचल के कई जिलों में बिजली वितरण को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है।
पूरे यूपी में सक्रिय हुआ विरोधी मोर्चा
गोरखपुर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे उत्तर प्रदेश में फैल चुका है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ,
आगरा समेत तमाम जिलों में बिजली कर्मचारी और अन्य मजदूर संगठन सड़कों पर उतर आए हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा और कई
सामाजिक संगठन भी इस आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।
ट्रेड यूनियन नेताओं का कहना है कि अगर सरकार अपनी जिद नहीं छोड़ती तो फरवरी में पूरे प्रदेश की
बिजली व्यवस्था ठप कर दी जाएगी और लाखों मजदूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे।
आगे क्या?
- 15-20 दिसंबर तक जिला स्तर पर बड़े प्रदर्शन और जनसभाएं प्रस्तावित।
- जनवरी में लखनऊ में विशाल मजदूर सम्मेलन।
- फरवरी 2026 में तारीख तय कर पूरे यूपी में आम हड़ताल।
मजदूरों का स्पष्ट कहना है – “श्रमिक अधिकार और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।”
यह आंदोलन आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

