गोरखपुर। घर जाने की जल्दी में इंसानियत कहां रह जाती है? गुरुवार शाम गोरखपुर जंक्शन पर जो हुआ, उसे देखकर किसी का भी कलेजा फट जाए। हिसार जाने वाली गोरखधाम एक्सप्रेस जैसे ही प्लेटफॉर्म पर आई, सैकड़ों यात्री दरवाजे-खिड़कियों पर टूट पड़े।
- एक बच्चा मां की गोद से छूटकर चीखता रहा
- एक बुजुर्ग नीचे गिर पड़े, लोग उनके ऊपर से चढ़ गए
- एक महिला रो-रोकर चिल्लाती रही – “मेरा बच्चा छूट गया!”
- और आरपीएफ के जवान हाथ जोड़कर बस इतना कहते रहे – “लाइन में लग जाओ… रुक जाओ भाई…”
लेकिन किसकी सुनता कोई?
वायरल वीडियो में जो दिखा, वो शब्दों में बयां नहीं हो सकता
- लोग सामान फेंककर कोच में घुस रहे हैं
- खिड़की से अंदर झांकते लोग, बाहर से धक्का देते लोग
- एक बच्चे की चीख – “मम्मी… मम्मी…”
- जनरल कोच के दरवाजे पर 20-25 लोग एक साथ फंसे हुए
- आरपीएफ का जवान चिल्ला रहा है – “अरे कोई मरेगा क्या!”
ये सब 2 मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। लाखों व्यूज, हजारों शेयर। हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है – “कब तक चलेगा ये तमाशा?”
हर साल यही कहानी, हर साल यही दर्द
- छठ-दिवाली के बाद अब क्रिसमस-नए साल की छुट्टियां
- पंजाब, हरियाणा, दिल्ली में काम करने वाले मजदूर घर लौट रहे हैं
- गोरखधाम एक्सप्रेस उनके लिए लाइफलाइन है
- लेकिन सिर्फ 4-5 जनरल कोच, बाकी सब रिजर्व्ड
- टिकट मिले तो मिले, वरना जान हथेली पर लेकर चढ़ो!
रेलवे अब भी सो रहा है?
- हर साल वीडियो वायरल होते हैं
- हर साल वादे होते हैं – “स्पेशल ट्रेन चलाएंगे”
- हर साल कुछ नहीं होता इस बार भी अधिकारी बोले – “हमने अतिरिक्त फोर्स लगाई थी” यात्री पूछ रहे हैं – “कहां लगाई थी भाई साहब?”
ये सिर्फ भीड़ नहीं, मजबूरी है!
ये लोग अमीरी की ट्रेन में नहीं चढ़ रहे। ये वही लोग हैं जो साल भर मेहनत करके अपने बच्चों के लिए दो जोड़ी कपड़े, एक खिलौना लेकर घर जा रहे हैं। और घर जाने के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
अब बस बहुत हुआ!
रेलवे को जगना होगा।
- कम से कम दिसंबर-जनवरी में 10 स्पेशल ट्रेनें चलनी चाहिए
- हर लंबी दूरी की ट्रेन में 8-10 जनरल कोच होने चाहिए
- प्लेटफॉर्म पर भीड़ कंट्रोल के लिए आर्मी जैसी फोर्स लगे


