गांधी-शास्त्री जयंती के दिन संसद पर ‘इंकलाब’ का फूंकेंगे बिगुल: पूर्वांचल गांधी

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राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अनेक मंत्रियों को विभिन्न जन सरोकार से जुड़े मुद्दों को लेकर अभी तक पर्यावरण विद्,

समाजविद पूर्वांचल गांधी डॉ सम्नपूर्णानन्द मल्ल ने 1000 से अधिक पत्रों के द्वारा अवगत कराया है.
किंतु गजब है विधायिका के पैरोकारों का रवैया जो किसी भी पत्र का जवाब ना देते हैं. ऐसे में पूर्वांचल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को फिर से पत्र लिखते हुए बताया है कि
“जब मैं पैदा हुआ था, मेरे हाथों में टैक्स की जंजीरें नहीं थी परंतु सत्ता के भूखे भेड़ियों ने जीवन टैक्स की जंजीरों में जकड़ दिया.”
आज लोकतंत्र पर 5000 क्रूर लुटेरे अपराधियों का कब्जा क्यों? समानता की आत्मा से बना संविधान कहां है? जीवन तबाह करने वाली महंगाई क्यों स्वीकार करूं?
जीएसटी रूपी क्रूर कोड़े से 145 करोड की चमड़ी उधेड़कर लगभग 20 से 25 करोड़ लोगों के लिए एक्सप्रेसवे एयरपोर्ट महंगी शिक्षा, महंगी चिकित्सा, महंगी वंदे भारत जैसी ट्रेन यह कैसा विकास है?
सवा सौ करोड़ लोगों के जीवन की कीमत पर लगभग 20 करोड धनी, अमीर माननीय का विकास? तत्काल बंद करें ऐसा विकास.
आटा, चावल, दाल, तेल, चीनी, दवा, हवा, पानी पर टैक्स तत्काल समाप्त कर दें और शपथ लें कि जब तक चांद सूरज रहेगा तब तक इस पर टैक्स नहीं लगाएंगे.
गरीब, अमीर सभी के लिए नि:शुल्क एक विद्यालय, एक चिकित्सालय, एक रेल एक संविधान 145 करोड़ को मिल जाए. 
इन्होंने माँग किया है कि विधायिका, कार्यपालिका की ‘सदस्यता एक बार’ ताकि लुटेरे अपराधियों का विधायिका कार्यपालिका पर कब्जा टूट जाए.
डीजल, पेट्रोल, सीएनजी ₹70/ ली, गैस सिलेंडर ₹500 बाइक एवं निजी गाड़ियों पर टोल टैक्स समाप्त कर दें ताकि महंगाई से मरते लोग बच सके.
क्रूर, लुटेरी, जालिम निरंकुश व्यवस्था, मेरे हजारों पत्र/ज्ञापन का जबाब क्यों नहीं रही है? क्या मान लूं कि यह ब्रिटिश वायसराय इरविन की हुकूमत है?
क्यों कोई जवाब नहीं दे रहा है? जब सत्याग्रह के लिए निकलता हूं तो पुलिस घर में रोक देती है. अरेस्ट कर देती है राष्ट्रपति  प्रधानमंत्री बताएं मैं क्या करूं?
कोई बताएं मैं क्या करूं? निरंकुश तानाशाही क्यों स्वीकार करूं? भगत सिंह ने कहा है “जो व्यवस्था हमारा जीवन’ आजादी  हमसे छीनती है उसे तोड़ना हमारा ‘कर्तव्य’ एवं ‘धर्म’ दोनों है.
रिवॉल्यूशन’ इंकलाब’ एकमात्र विकल्प है. इंकलाब सत्य, अहिंसा आधारित होगा, तिरंगा’ संविधान’ के साथ गांधी, शास्त्री जयंती 2 अक्टूबर संसद पर.
मुझे हाउस अरेस्ट या मार्ग अरेस्ट कर मेरी स्वतंत्रता के अधिकार की हत्या न करें इससे अच्छा होगा ऐसी हुकूमत रहने तक मुझे कारागार में डाल दें.
जीवन सुरक्षा मेरा मौलिक अधिकार है इसलिए मेरी कड़ी सुरक्षा करें. सत्ता के भूखे लोग गांधी की तरफ किसी वक़्त मेरी हत्या कर सकते हैं.

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