(के.एन. साहनी)
पूर्वांचल गांधी के नाम से प्रसिद्ध डॉ. संपूर्णानंद मल्ल को दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय (DDU) द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले से नाराज डॉ. मल्ल ने 1 अप्रैल, 2025 को गोरखपुर स्थित कुलपति आवास के सामने मौन सत्याग्रह करने का ऐलान किया है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे राज्यपाल का पुतला दहन कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे.
प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने बताया कि “मेरी नियुक्ति पूर्ण रूप से वैध और मर्यादित है. इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मनमाने तरीके से मुझे अयोग्य घोषित कर दिया, यह फैसला न्याय की हत्या जैसा है.
यदि प्रशासन ने मेरी बहाली सुनिश्चित नहीं किया तो 1 अप्रैल को हम कुलपति आवास के सामने शांतिपूर्ण सत्याग्रह करेंगे. उनकी लड़ाई केवल व्यक्तिगत न्याय के लिए नहीं है, बल्कि यह शिक्षा जगत में हो रहे अन्याय और पक्षपात के खिलाफ भी है.”
प्रेस वार्ता में शिवाजी त्रिपाठी ने डॉ. मल्ल का समर्थन करते हुए कहा कि, “डॉ. मल्ल एक योग्य, वरिष्ठ और ईमानदार शिक्षक हैं. उन्हें अयोग्य ठहराना विश्वविद्यालय प्रशासन का तानाशाही कदम है. हम इस अन्याय के खिलाफ मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे.”
उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो पूरे शिक्षा जगत को एकजुट कर आंदोलन किया जाएगा. कई शिक्षकों ने इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की तानाशाही करार दिया है.
छात्रों का कहना है कि डॉ. मल्ल जैसे योग्य शिक्षक को अयोग्य ठहराना न केवल शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार है बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है.
DDU प्रशासन पर सवाल:
मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी संदेहास्पद मानी जा रही है. शिक्षाविदों का कहना है कि डॉ. मल्ल जैसे शिक्षक को बिना उचित प्रक्रिया के अयोग्य ठहराना न्यायसंगत नहीं है.
यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द ही निर्णय को वापस नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन होने की संभावना जताई जा रही है. शिक्षा जगत में बड़ा मुद्दा बनने की आशंका है.


