ऐपवा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के फैसले को शर्मनाक बताकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा ज्ञापन

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  • 2012 में निर्भया कांड के बाद महिला आंदोलन के जरिए अस्तित्व में आई जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए

राष्ट्र व्यापि विरोध प्रदर्शन के तहत अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करके  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित ज्ञापन गोरखपुर जिलाधिकारी को सौंपा है.

ऐपवा नेता मनोरमा चौहान ने कहा कि हाल में यूपी के कासगंज जिले की 11 साल की नाबालिग बच्ची के साथ हुई घटना के संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस राम मनोहर मिश्रा ने बेहद शर्मनाक फैसला दिया है.

हाईकोर्ट ने इस केस में फैसला दिया “आरोपियों ने बच्ची की छाती को पकड़ा उसके निचले कपड़े उतारने की कोशिश की और पजामे की डोरी तोड़ दी. वे उसे पुल के नीचे घसीटने की कोशिश कर रहे थे.

पर गवाहों के आने की वजह से वे उसे छोड़कर भाग गए. इन बातों से यह साबित नहीं होता कि आरोपियों का बलात्कार करने का पक्का इरादा था. इसके अलावा उनकी ओर से कोई और हरकत नहीं दिखी जो उनकी बलात्कार की मंशा को आगे बढ़ाए.”

इलाहाबाद हाई कोर्ट के महिला विरोधी इस फैसले में पोस्को एक्ट की धारा 30 को भी लागू नहीं किया जो नाबालिग के अधिकार को सुनिश्चित करता है.

इससे साबित होता है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इस केस को बलात्कार न मानकर पोस्को एक्ट के मकसद और बलात्कार से जुड़े कानूनों के उद्देश्य को ही पूरा करने में पूरी तरह से नाकाम रही.

सभा को वरिष्ठ ऐपवा नेता व भाकपा-माले जिला कमेटी सदस्य जगदम्बा देवी ने कहा कि जिले मे रोज ब रोज लड़कियों, महिलाओं के साथ यौन हिंसा हो रही है.

योगी सरकार महिला हिंसा पर रोक लगाने में असफल है और हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अपराधियों का मन और बढ़ जाएगा. इस लिए हम मांग करते हैं कि इलाहाबाद के इस असंवैधानिक पुरुष सत्तात्मक फैसले को रद्द किया जाय.

आरोपियों की गिरफ्तारी करके उन्हें कड़ी सजा की गारंटी सुनिश्चित कर पीड़िता को न्याय प्रदान किया जाय. भविष्य में न्यायालय किसी भी केस में महिला विरोधी रुख लेते हुए फैसले न सुनाए,

इसके लिए जरुरी है कि समय-समय पर सभी न्यायालयों के जजों की जेंडर सेंस्टाइजेशन ट्रेनिंग को अनिवार्य किया जाए. 2012 में निर्भया कांड के बाद महिला आंदोलन के जरिए अस्तित्व में आई जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए.

प्रदर्शन में गुुड़िया, प्रिती, बंदना निषाद, शान्ति यादव, पुष्प चौहान, समेत दर्जनों महिला शामिल थीं.

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